मोदी की आचार्य महाप्रज्ञ को श्रद्धांजलि
श्री मोदी ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की जन्म शताब्दी के पवित्र अवसर पर वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से अपने संदेश में कहा, “ आचार्य महाप्रज्ञ जी ने हम सबको एक मंत्र दिया था।
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संत प्रवर आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की जन्म शताब्दी पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए आज कहा कि योग के महान साधक ने देश को ‘स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज, स्वस्थ अर्थव्यवस्था’ का मंत्र दिया था जो आज की परिस्थिति में सबके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।
श्री मोदी ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की जन्म शताब्दी के पवित्र अवसर पर वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से अपने संदेश में कहा, “ आचार्य महाप्रज्ञ जी ने हम सबको एक मंत्र दिया था। उनका ये मंत्र था ‘स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज, स्वस्थ अर्थव्यवस्था। आज की परिस्थिति में उनका ये मंत्र हम सबके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है। आज देश इसी मंत्र के साथ, आत्मनिर्भर संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि आचार्य ने खुद भी इस जीवन शैली को जिया और लाखों करोड़ों लोगों को भी सिखाया। योग के माध्यम से, लाखों करोड़ों लोगों को उन्होंने अवसाद मुक्त जीवन की कला सिखाई। यह भी एक सुखद संयोग है कि एक दिन बाद ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी है। उन्होंने कहा , “ हमारे लिए ये भी एक अवसर होगा कि हम सब ‘सुखी परिवार और समृद्ध राष्ट्र’ के महाप्रज्ञ जी के स्वप्न को साकार करने में अपना योगदान दें, उनके विचारों को समाज तक पहुंचाएँ। मुझे विश्वास है, जिस समाज और राष्ट्र का आदर्श हमारे ऋषियों, संत आत्माओं ने हमारे सामने रखा है, हमारा देश जल्द ही उस संकल्प को सिद्ध करेगा। आप सब उस सपने को साकार करेंगे। ”
श्री मोदी ने कहा , “ मेरे जीवन में ये अवसर, आचार्य श्री का विशेष स्नेह और आशीर्वाद का सौभाग्य निरंतर मिलता रहा है। मुझे याद है, जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री बना था तब उस समय भी उनका गुजरात आना हुआ था। मुझे उनकी अहिंसा यात्रा में, मानवता की सेवा के अभियान में शामिल होने का अवसर मिला था। मैंने तब आचार्य प्रवर के सामने कहा था, ‘मैं चाहता हूँ ये तेरा पंथ मेरा पंथ बन जाए’। आचार्य श्री के स्नेह से तेरा पंथ भी मेरा पंथ बन गया, और मैं भी आचार्य श्री का बन गया। ”
उन्होंने कहा कि आचार्य के सानिध्य में यह अनुभव हुआ कि उनके जैसे युगऋषि के जीवन में अपने लिए कुछ नहीं होता है। उनका जीवन, उनका विचार, उनका चिंतन, सब कुछ समाज के लिए, मानवता के लिए ही होता है।
आचार्य महाप्रज्ञ जी कहते भी थे, ‘मैं और मेरा छोड़ो तो सब तुम्हारा ही होगा’। उनका ये मंत्र, उनका ये दर्शन उनके जीवन में स्पष्ट दिखाई भी देता था।