संस्कृत को बढावा देने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी की लें मदद : राष्ट्रपति

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि संस्कृत को बढावा देने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए

Update: 2018-04-22 00:27 GMT

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि संस्कृत को बढावा देने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। 

श्री कोविंद ने यहां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के 17 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस संस्थान ने पिछले 55 वर्षों में शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में स्वस्थ और श्रेष्ठ परंपराओं का निर्वहन किया है। उन्होंने कहा कि विद्यापीठ में एक आधुनिक विद्या संकाय है जिसमें छात्र अनेक आधुनिक विषयों के साथ साथ पर्यावरण , विज्ञान और मानवाधिकार जैसे समसामयिक विषयों का भी अध्ययन कर रहे हैं। यह भी सराहनीय है कि इस आधुनिक विज्ञान संकाय में ‘कंप्यूटर एप्लीकेशन्स’ की शिक्षा की व्यवस्था है। 

उन्होंने कहा कि संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की जरूरत है। इस संदर्भ में विद्यापीठ में इलेक्ट्रानिक स्नातकोत्तर पाठयक्रम की सुविधा सराहनीय है। प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोडने का यह प्रयास छात्रों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा। 

राष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृत भाषा में केवल अध्यात्म ,दर्शन, भक्ति, कर्मकांड और साहित्य की ही रचना नहीं हुई है बल्कि यह ज्ञान विज्ञान की भी भाषा रही है। आर्यभट्ट , वराह मिहिर , भास्कर , चरक और सुश्रुत जैसे अनेक वैज्ञानिकों तथा गणीतज्ञों के मूल्यवान ग्रंथों की रचना संस्कृत में ही हुई है। आज पूरे विश्व में योगशास्त्र की चर्चा हो रही है। आयुर्वेद की लोकप्रियता भी लगातार बढ रही है। उन्होंने कहा कि यह सारा ज्ञान अपने मूल रूप में संस्कृत भाषा में ही उपलब्ध है। 

श्री कोविंद ने कहा कि आज अनेक विद्वान यह मानते हैं कि नियमबद्ध , सूत्रबद्ध और तर्कपूर्ण व्याकरण पर आधारित संस्कृत भाषा ‘एल्गोरिथम’ लिखने और यहां तक कि ‘आर्टिफीशियल इंटेंलिजेंस ’ के लिए भी सर्वाधिक उपयुक्त भाषा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा में ज्ञान और विवेक की वह संजीवनी बूटी मौजूद है जिसके बल पर विभिन्न विसंगतियों और संकटों से जूझ रही दुनिया को बचाया जा सकता है और बेहतर बनाया जा सकता है।

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