मंत्री ने नैनो उर्वरकों के क्षेत्र परीक्षण की घोषणा की
देश के किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक नई पहल शुरू
कल्लोल (गुजरात)। देश के किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक नई पहल शुरू करते हुए केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री डी. बी. सदानंद गौड़ा ने देश की अग्रणी सहकारी संस्था इफको की गुजरात के कलोल स्थित इकाई में रविवार को नैनो प्रौद्योगिकी आधारित नैनो नाइट्रोजन, नैनो जिंक और नैनो कॉपर का लोकार्पण करते हुए इसके क्षेत्र परीक्षण की घोषणा की। देश की अग्रणी उर्वरक सहकारी संस्था इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर्स को-ऑपरेटिव (इफको) की कलोल इकाई स्थित अत्याधुनिक नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर में देसी तकनीक से इन उर्वरकों को विकसित किया गया है। इफको द्वारा आयोजित यहां एक कार्यक्रम में उन्होंने इन उर्वरकों के क्षेत्र परीक्षण करने की भी घोषणा की।
गौड़ा ने नैनो उर्वरक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ग्रीन परियोजना' बताते हुए कहा कि इन उर्वरकों का इस्तेमाल किए जाने से न सिर्फ किसानों की आमदनी दोगुनी करने में मदद मिलेगी, बल्कि ये मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता में सुधार लाने में भी सहायक होंगे।
नैनो प्रौद्योगिकी आधारित उर्वरक बनाने की दिशा में इफको के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उर्वरक के क्षेत्र में निरंतर नए प्रयोग करने की जरूरत है, ताकि कृषि की लागत को कम किया जा सके, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
इस मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 34 प्रगतिशील किसानों ने भी हिस्सा लिया, जिनमें कई पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित किसान भी शामिल थे।
इफको ने बताया कि परंपरागत रासायनिक उर्वरकों की तुलना में नैनो उर्वरकों की जरूरत 50 फीसदी कम होती है, जबकि फसलों की पैदावार में 15 से 30 फीसदी की वृद्धि होती है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है। पर्यावरण हितैषी इन उर्वरकों के प्रयोग से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है।