अहमदाबाद: T20 World Cup 2026 Final: टी20 विश्व कप की शुरुआत में भारतीय टीम को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। उस समय टीम के प्रशंसकों की सबसे ज्यादा उम्मीद दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) और नंबर एक टी20 गेंदबाज वरुण चक्रवर्ती (Varun Chakraborty) से थी। लेकिन टूर्नामेंट के अहम चरणों में इन दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है।
अभिषेक शर्मा का बल्ला पूरे टूर्नामेंट में खामोश रहा है, जबकि वरुण चक्रवर्ती की रहस्यमयी स्पिन गेंदबाजी का प्रभाव भी कम होता नजर आया है। ऐसे में फाइनल मुकाबले से पहले इन दोनों खिलाड़ियों की फॉर्म भारतीय टीम प्रबंधन के लिए चिंता का विषय बन गई है। आमतौर पर किसी भी टीम की विजेता एकादश में फाइनल से पहले बदलाव नहीं किया जाता, लेकिन यदि इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन निर्णायक मुकाबले में भी ऐसा ही रहा तो टीम को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अभिषेक का प्रदर्शन बना चिंता का कारण
टी20 विश्व कप शुरू होने से पहले अभिषेक शर्मा को भारतीय बल्लेबाजी क्रम की मजबूत कड़ी माना जा रहा था। बाएं हाथ के इस आक्रामक बल्लेबाज से उम्मीद थी कि वह पावरप्ले में टीम को तेज शुरुआत दिलाएंगे। टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में चर्चा इस बात को लेकर ज्यादा थी कि विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन टीम में अपनी जगह पक्की कर पाएंगे या नहीं। लेकिन जैसे-जैसे प्रतियोगिता आगे बढ़ी, परिस्थितियां बदलती गईं। सैमसन ने हाल के मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया, जबकि अभिषेक का प्रदर्शन लगातार गिरता गया।
इस विश्व कप में अभिषेक शर्मा के स्कोर उनकी खराब लय को साफ दिखाते हैं। उन्होंने क्रमशः 0, 0, 0, 15, 55, 10 और 9 रन बनाए हैं। जिंबाब्वे के खिलाफ लगाए गए अर्धशतक को छोड़ दें तो बाकी मैचों में उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। फाइनल से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीम प्रबंधन उन्हें अंतिम मुकाबले में भी मौका देगा या फिर बदलाव पर विचार करेगा।
बीमारी और रणनीति दोनों बने परेशानी की वजह
अभिषेक शर्मा की खराब फॉर्म के पीछे कुछ खास कारण भी सामने आए हैं। मुंबई में खेले गए पहले लीग मैच के बाद उन्हें पेट में संक्रमण की समस्या हो गई थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा। इस दौरान उनका वजन भी कम हो गया और इसका असर उनकी फिटनेस और लय दोनों पर पड़ा। इसके अलावा विरोधी टीमों ने भी उनके खिलाफ खास रणनीति तैयार कर ली है। कप्तानों ने पावरप्ले में उनके सामने तेज गेंदबाजों की बजाय धीमी गति के गेंदबाजों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से ऑफ स्पिनर और बाएं हाथ के स्पिनरों के खिलाफ उन्हें संघर्ष करते देखा गया है।
अभिषेक स्वाभाविक रूप से तेज गति की गेंदों पर आक्रामक बल्लेबाजी करना पसंद करते हैं। लेकिन धीमी गेंदों के सामने उन्हें सही टाइमिंग हासिल करने में परेशानी हो रही है। पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने ऑफ स्पिनर पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में हवा में कैच दे दिया। नीदरलैंड्स के खिलाफ उन्हें ऑफ स्पिनर ने कोण लेती गेंद पर आउट किया। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी उन्होंने धीमी गेंद पर जल्दबाजी में शॉट खेलने की कोशिश की और जल्दी पवेलियन लौट गए।
तकनीकी समस्या भी आ रही सामने
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अभिषेक शर्मा की तकनीक में भी एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण समस्या नजर आ रही है। उनके बल्ले का डाउनस्विंग काफी तेज होता है। तेज गेंदबाजी के खिलाफ यह शैली काफी कारगर रहती है, लेकिन जब गेंद धीमी गति से आती है तो उसी गति से बल्ला नीचे लाने के कारण टाइमिंग बिगड़ जाती है। यही कारण है कि धीमी गेंदों के खिलाफ उन्हें सही शॉट खेलने में दिक्कत हो रही है और वे जल्द ही अपना विकेट गंवा रहे हैं।
टीम संयोजन में बदलाव आसान नहीं
भारतीय टीम के पास विकल्प के तौर पर रिंकू सिंह मौजूद हैं, जिन्हें टीम में शामिल किया जा सकता है। लेकिन ऐसा करने से टीम का बल्लेबाजी संतुलन प्रभावित हो सकता है। यदि रिंकू सिंह को टीम में शामिल किया जाता है तो उन्हें सातवें या आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है। इस स्थिति में उनके पास ज्यादा गेंदें खेलने का मौका नहीं मिलेगा, जिससे उनके प्रभावी प्रदर्शन की संभावना कम हो सकती है। इसी वजह से टीम प्रबंधन फिलहाल उस संयोजन को बनाए रखने के पक्ष में नजर आ रहा है, जिसने टीम को फाइनल तक पहुंचाया है।
वरुण चक्रवर्ती की गेंदबाजी भी चिंता का विषय
जहां अभिषेक शर्मा का बल्ला नहीं चल रहा है, वहीं दूसरी ओर वरुण चक्रवर्ती की गेंदबाजी भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। एक समय उनकी रहस्यमयी स्पिन गेंदबाजी बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती थी, लेकिन हाल के मैचों में बल्लेबाज उन्हें आसानी से खेलने लगे हैं। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उनका प्रदर्शन खास तौर पर निराशाजनक रहा। उन्होंने अपने चार ओवरों में 64 रन खर्च कर दिए, जो टी20 जैसे अहम मुकाबले में काफी महंगा साबित हुआ। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अब बल्लेबाज उनकी ‘मिस्ट्री स्पिन’ को समझने लगे हैं और इसी कारण वे लगातार रन बना रहे हैं।
कुलदीप यादव को मौका देने की मांग
भारतीय टीम छह गेंदबाजी विकल्पों के साथ मैदान में उतर रही है। इनमें शिवम दुबे की गेंदबाजी पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल माना जाता है। ऐसे में यदि वरुण चक्रवर्ती महंगे साबित होते हैं तो टीम पर दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि फाइनल मुकाबले में कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव को मौका दिया जा सकता है, जो अपनी विविधता और अनुभव से बल्लेबाजों को अधिक परेशान कर सकते हैं।
टीम प्रबंधन का वरुण पर भरोसा बरकरार
हालांकि टीम के अंदर से वरुण चक्रवर्ती के समर्थन की आवाज भी आ रही है। भारत के उपकप्तान अक्षर पटेल ने कहा कि टीम ने उनकी मौजूदा समस्याओं को लेकर उनसे बात की है। अक्षर ने कहा कि नाकआउट मुकाबलों में मानसिक मजबूती बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि टीम प्रबंधन ने वरुण को अपनी रणनीति पर कायम रहने की सलाह दी है। अक्षर पटेल के अनुसार, कई बार दबाव की स्थिति में गेंदबाज अपनी मूल योजना बदल देते हैं, जिससे प्रदर्शन पर असर पड़ता है। टीम ने वरुण से कहा है कि वे आत्मविश्वास बनाए रखें और विकेट लेने की अपनी रणनीति पर टिके रहें।
फाइनल से पहले भारत के सामने बड़ी परीक्षा
टी20 विश्व कप के फाइनल से पहले भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि उसके दो अहम खिलाड़ी सही समय पर अपनी लय वापस हासिल कर पाएं। यदि अभिषेक शर्मा बल्ले से टीम को तेज शुरुआत दिलाते हैं और वरुण चक्रवर्ती अपनी रहस्यमयी गेंदबाजी का प्रभाव वापस हासिल कर लेते हैं, तो भारत के लिए खिताब जीतने का रास्ता आसान हो सकता है। लेकिन अगर इन दोनों खिलाड़ियों की फॉर्म में सुधार नहीं हुआ तो फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को कठिन स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।