खाली प्लॉटों के मालिकों का डाटा लेगा मलेरिया विभाग

 मलेरिया विभाग शहर में खाली प्लॉटों के मालिकों का डाटा एकत्रित करेगा

Update: 2017-10-09 14:51 GMT

पलवल।  मलेरिया विभाग शहर में खाली प्लॉटों के मालिकों का डाटा एकत्रित करेगा। ऐसा इसलिए होगा ताकि गंदगी और जलभराव रोकने के लिए विभाग सीधा प्लॉट मालिकों को निर्देश जारी कर सके। अब तक ये निर्देश नगर परिषद या हुडा अथॉरिटी के माध्यम से भिजवाया जाता है। मगर इन विभागों की मच्छरों की तादाद रोकने को लेकर सुस्ती के चलते मलेरिया विभाग को खुद के स्तर पर ही प्रयास करने की जरूरत पड़ी है।

डाटा मिलने के बाद अधिक दिन तक जलभराव रहने पर मलेरिया विभाग प्लॅाट मालिक को नोटिस जारी करेगा। अगर पहले नोटिस में जलभराव नहीं रोका गया तो दूसरी बार में जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

यह आ रही है समस्या-दरअसल, शहर की कई कालोनियों में खाली पड़े प्लॉट कूड़ेदान बन चुके हैं। बारिश के समय इन खाली प्लॉटों में दस-दस दिन तक पानी जमा रहता है। जिस पर मच्छरों की तादाद बढ़ जाती है। मच्छरों के कारण आसपास में रहने वाले लोगों में मच्छरजनित बीमारियां फैलने का भय बन जाता है। डेंगू या मलेरिया के केस बढ़ने पर सबसे ज्यादा दिक्कत मलेरिया विभाग को ही उठानी पड़ती है। बार-बार नगर परिषद व जनस्वास्थ्य विभाग को अवगत करवाने पर भी जलभराव खत्म नहीं होता है।

जनस्वास्थ्य व नगर परिषद सुस्त-शहर में जलभराव रोकने और गंदगी खत्म कर सफाई व्यवस्था कायम करने में जनस्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद दोनों ही विभागों की सुस्त चाल है। नगर परिषद के पास जहां पूरे शहर की सफाई व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए पर्याप्त सफाई कर्मचारी नहीं हैं, तो जनस्वास्थ्य विभाग सिर्फ मुख्य मार्गों व बाजारों से ही जलभराव खत्म करता है। 

खाली प्लॉटों को उनके मालिकों के भरोसे ही छोड़ दिया जाता है। प्लॉट मालिक भी नहीं देते ध्यान-अधिकांश खाली प्लॉटों की उनके मालिक भी सुध नहीं लेते हैं। शहर में अनेक इलाके ऐसे हैं, जहां खाली पड़े प्लॉटों पर न तो नगर परिषद ध्यान देती है और न ही उन प्लॉटों के मालिक। इसलिए इन प्लॉटों की न कभी सफाई होती है और न ही जलभराव खत्म होता है।


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