मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित टूट की चर्चा तेज हो गई है। 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद पार्टी को बड़ा झटका लगा था और अब एक बार फिर उद्धव ठाकरे के सामने अपने संगठन को एकजुट बनाए रखने की चुनौती खड़ी होती दिख रही है। हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
'मातोश्री' में बुलाई बैठक में पहुंचे सिर्फ चार सांसद
संभावित राजनीतिक हलचलों के बीच उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने आवास 'मातोश्री' में शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसदों की अहम बैठक बुलाई। हालांकि, पार्टी के नौ सांसदों में से केवल चार सांसद ही बैठक में मौजूद रहे। इनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल शामिल थे। बाकी पांच सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को और तेज कर दिया।
वर्चुअल मौजूदगी के दावे पर उठे सवाल
बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने दावा किया कि अनुपस्थित सांसद वर्चुअल माध्यम से बैठक से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, नागेश पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख ऑनलाइन शामिल हुए थे, जबकि सांसद संजय जाधव ने फोन पर बातचीत कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। हालांकि, बाद में ऐसी खबरें सामने आईं कि अधिकांश सांसद वास्तव में बैठक से नहीं जुड़े थे, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया।
शिंदे गुट से संपर्क की चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल
इसी दौरान यह भी चर्चा रही कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की दिल्ली यात्रा के दौरान उनके खेमे के नेताओं ने कुछ सांसदों से संपर्क किया। खबरों के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रतापराव जाधव से मुलाकात की। प्रतापराव जाधव ने कहा कि सभी सांसद पुराने साथी हैं और उनमें से कुछ अपने वर्तमान नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं।
'ऑपरेशन टाइगर' के दावे से बढ़ी सियासी सरगर्मी
शिंदे गुट के नेताओं की ओर से लगातार ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद और विधायक उनके संपर्क में हैं। विधान परिषद सदस्य कृपाल तुमाने ने दावा किया कि सात लोकसभा सांसद शिंदे गुट में शामिल होने के लिए तैयार हैं और संसद के मानसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई विधायक भी शिंदे गुट के संपर्क में हैं।
संजय राउत का पलटवार
इन दावों के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि पार्टी के सभी नौ सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने शिंदे गुट के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जल्द ही उनकी पार्टी 'ऑपरेशन वुल्फ' शुरू करेगी और इसका लक्ष्य शिंदे गुट के सांसदों और विधायकों को अपने साथ जोड़ना होगा।
दलबदल कानून के कारण संख्या का महत्व
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत यदि दो-तिहाई यानी कम से कम छह सांसद एक साथ अलग होते हैं, तभी वे अयोग्यता से बच सकते हैं। इसी वजह से छह या उससे अधिक सांसदों के संभावित रुख पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
उद्धव ठाकरे बोले- जाना है तो कोई रोक नहीं
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अगर कोई नेता या सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे रोका नहीं जाएगा। उन्होंने 2022 की बगावत का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी उन्हें परिस्थितियों का अंदाजा था, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव नहीं बनाया। उनके अनुसार, जो लोग जाना चाहते हैं, वे अपनी इच्छा से जा सकते हैं।