CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप, भाजपा ने किया पलटवार; कहा- धमकी देने वाले का नाम बताएं

दीपके ने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं सच हैं तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी छात्रों की आवाज सुनने की है, न कि उन्हें डराने की।;

Update: 2026-07-31 03:09 GMT

छत्रपति संभाजीनगर : काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि छात्र आंदोलनों के दौरान उन्हें लगातार दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, उन्हें यह संदेश दिया गया कि यदि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल नहीं हुए तो उनके परिवार के लिए मुश्किलें खड़ी की जा सकती हैं। दीपके ने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं सच हैं तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी छात्रों की आवाज सुनने की है, न कि उन्हें डराने की।

'संसद चलो' मार्च में बल प्रयोग को लेकर उठाए सवाल

सीजेपी संस्थापक ने 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका दावा था कि पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है, इसलिए केंद्रीय गृह मंत्री को घटनाक्रम की जानकारी होना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ सख्ती बरती गई और बाद में भी कई प्रतिभागियों को कथित रूप से डराने और हिरासत में लेने की कार्रवाई जारी रही। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

विदेशी फंडिंग के आरोपों पर भी दी सफाई

अभिजीत दीपके ने अपने संगठन पर लगाए गए विदेशी फंडिंग के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में किसी विदेशी स्रोत से धन आया होता, तो यह देश की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता मानी जाती और इसकी जिम्मेदारी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों तथा गृह मंत्रालय पर होती। उन्होंने कहा कि उनके संगठन के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इनका उद्देश्य आंदोलन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना है।

राहुल गांधी की मांग का किया समर्थन

दीपके ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी घटना में जवाबदेही तय होती है तो संबंधित जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से जवाब मांगा जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस संबंध में कोई नया साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया और अपने दावों को राजनीतिक जवाबदेही के संदर्भ में रखा।

बिहार की घटना और संस्थाओं पर भी उठाए सवाल

सीजेपी संस्थापक ने बिहार में छात्रों से जुड़े एक कथित गोलीबारी मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अस्पतालों में घायल छात्रों से मुलाकात की थी और घटना को गंभीर बताया। इसके साथ ही उन्होंने देश की जांच एजेंसियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। दीपके ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का दायित्व निष्पक्ष तरीके से काम करना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। उन्होंने योग गुरु बाबा रामदेव पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक बयान देने के बजाय अपने व्यावसायिक कार्यों और उत्पादों की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

किसानों के आंदोलन को समर्थन देने की बात

दीपके ने कहा कि यदि भविष्य में किसानों को उनके संगठन के समर्थन की आवश्यकता होती है, तो सीजेपी उनके साथ खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी विभिन्न सामाजिक और छात्र मुद्दों पर अपनी भूमिका निभाती रहेगी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेगी।

भाजपा ने आरोपों को बताया निराधार

अभिजीत दीपके के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि यदि दीपके को वास्तव में किसी ने धमकी दी है तो उन्हें संबंधित व्यक्ति का नाम सार्वजनिक करना चाहिए और उचित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। केवल बिना सबूत के भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक दल पर आरोप लगाना उचित नहीं है। बावनकुले ने कहा कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक चर्चा में बने रहने और सहानुभूति हासिल करने की कोशिश प्रतीत होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्य प्रस्तुत किए बिना गंभीर आरोप लगाना लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है।

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