उद्धव ठाकरे को लगा बड़ा झटका, 6 सांसदों ने अलग गुट बनाकर स्पीकर से मांगी मान्यता

सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग गुट के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है।;

Update: 2026-06-17 10:38 GMT

मुंबई: Major split in Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को, लोकसभा में बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। पार्टी के नौ सांसदों में से छह सांसदों ने अलग गुट बनाकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उन्हें स्वतंत्र समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इस घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व और पार्टी की एकजुटता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

छह सांसदों ने स्पीकर को सौंपा पत्र

सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग गुट के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है। दलबदल विरोधी कानून के तहत दो-तिहाई सांसदों का समर्थन मिलने की स्थिति में उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है। नौ सांसदों वाली पार्टी में छह सांसदों का एक साथ अलग होना इसी गणित के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिल्ली पहुंचकर की राजनीतिक गतिविधियां

बताया जा रहा है कि बागी सांसद बुधवार सुबह विभिन्न स्थानों से निजी विमान के जरिए दिल्ली पहुंचे। उनके साथ एकनाथ शिंदे गुट के एक वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। इसके बाद सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को शिवसेना (यूबीटी) के लिए एक और बड़े संकट के रूप में देखा जा रहा है।

उद्धव खेमे के नेता भी पहुंचे स्पीकर के पास

दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत, अनिल देसाई और संजय राउत ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। मुलाकात के बाद अरविंद सावंत ने कहा कि उन्होंने स्पीकर से अनुरोध किया है कि किसी भी कार्रवाई में संविधान और नियमों का पालन किया जाए। संजय राउत ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें आश्वस्त किया है कि सभी फैसले कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लिए जाएंगे।

संजय राउत ने लगाए खरीद-फरोख्त के आरोप

दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में संजय राउत ने दावा किया कि पार्टी के सांसदों को पाला बदलने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों तक करोड़ों रुपये पहुंचाए गए हैं। राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में सांसदों की खरीद-फरोख्त हुई है और भाजपा की ओर से शिवसेना को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, उन्हें पहले सांसद पद से इस्तीफा देना चाहिए।

उद्धव ठाकरे के साथ फिलहाल तीन सांसद

बगावत की खबरों के बीच दिल्ली में संजय राउत के आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे मौजूद रहे। इससे संकेत मिला कि लोकसभा में पार्टी के केवल तीन सांसद ही खुलकर उद्धव ठाकरे के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

'मशाल' के नाम पर मिली जीत का हवाला

संजय राउत ने कहा कि सभी नौ सांसद शिवसेना (यूबीटी) के चुनाव चिह्न 'मशाल' पर जीतकर संसद पहुंचे हैं और उनकी जीत के पीछे उद्धव ठाकरे का नेतृत्व था। उन्होंने कहा कि ये सांसद किसी अन्य नेता के नाम पर नहीं, बल्कि पार्टी और उसके संगठन के समर्थन से निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में यदि कोई दल बदलना चाहता है तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बढ़ी हलचल

2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना में हुए विभाजन का असर अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ था कि अब लोकसभा स्तर पर नया संकट सामने आ गया है। यदि छह सांसदों का अलग गुट औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त कर लेता है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और आगे की राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।

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