जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा, भाजपा विधायकों का बहिर्गमन
जम्मू-कश्मीर विधान सभा में सत्र हंगामेदार रहा। विधानसभा में बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से माफी की मांग को लेकर सदन से बहिर्गमन किया
उमर अब्दुल्ला से माफी की मांग, सदन में तीखी बहस
- स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा विधायकों में आरोप-प्रत्यारोप
- अध्यक्ष ने कहा, मंगलवार की घटना दुर्भाग्यपूर्ण
- भाजपा ने सरकार को जनविरोधी करार दिया, सदन से बाहर लगाए नारे
जम्मू। जम्मू-कश्मीर विधान सभा में बुधवार का सत्र हंगामेदार रहा। विधानसभा में बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से माफी की मांग को लेकर सदन से बहिर्गमन किया।
यह हंगामा मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश के बजट पर बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री की बातों से शुरू हुआ। श्री अब्दुला ने बजट का बचाव किया था और भारत-अमेरिका व्यापार सौदा की आलोचना की थी। कुछ बातों पर भाजपा विधायकों ने एतराज जताया और माफी की मांग करते हुए नारे लगाये। उन्होंने मुख्यमंत्री की कुछ बातों को 'असंसदीय' बताया।
आज पूर्वाह्न 10 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई भाजपा सदस्यों ने फिर से मुख्यमंत्री के बयानों पर आपत्ति जतायी। चूंकि श्री अब्दुल्ला सदन में अनुपस्थित थे, विधायकों ने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि उनका बयान 'संसदीय' था या फिर वह इस पर माफी मांगे।
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला की सदन में अनुपस्थिति में स्वास्थ्य मंत्री सकीना इतू ने मोर्चा संभाला और कहा कि भाजपा ने भी विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों और मंत्रियों के बारे में ऐसी टिप्पणियां की हैं। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा विधायकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गयी।
हंगामे के बीच स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भाजपा को उन 50 बच्चों से माफी मांगनी चाहिए जिनका भविष्य उन्होंने बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर एक मेडिकल कॉलेज (श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल संस्थान) को बंद कर दिया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि मंगलवार को जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस्तेमाल किये गये शब्द विधानसभा के इतिहास में अपनी तरह के पहले शब्द थे। उन्होंने अध्यक्ष से इस बात का आश्वासन मांगा कि मुख्यमंत्री को अपनी टिप्पणी पर सदन को संबोधित करना चाहिए। जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने अध्यक्ष से कहा कि उन शब्दों को रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है।
इसके बाद भाजपा विधायकों ने 'सरकार विरोधी' नारों के बीच सदन से बहिर्गमन किया। बाद में सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा और रणबीर पठानिया ने कहा कि विपक्ष केवल मुख्यमंत्री से माफी की मांग कर रहा है या फिर वे सदन में कही गयी अपनी बातों को सही साबित करें।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अध्यक्ष के साथ विस्तृत चर्चा की है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार को 'जनविरोधी' करार दिया। अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने भाजपा विधायकों से कहा कि उन्होंने बहिर्गमन कर इस मामले को पहले ही बंद कर दिया है।