जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, जैश-ए-मोहम्मद का पाकिस्तानी आतंकी ढेर, एम4 कर्बाइन बरामद

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के पहाड़ी और जंगली क्षेत्र बिलावर में शुक्रवार को सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक पाकिस्तानी आतंकी को मुठभेड़ में मार गिराया।

Update: 2026-01-24 04:57 GMT

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के पहाड़ी और जंगली क्षेत्र बिलावर में शुक्रवार को सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक पाकिस्तानी आतंकी को मुठभेड़ में मार गिराया। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की अहम कामयाबी माना जा रहा है। मुठभेड़ के बाद भी इलाके में अन्य आतंकियों के छिपे होने की आशंका के चलते पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान जारी है।

मारे गए आतंकी की पहचान, हथियार बरामद

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मारे गए आतंकी की पहचान जुबैर के रूप में हुई है, जो पाकिस्तान का नागरिक था और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा हुआ था। मुठभेड़ स्थल से उसके पास से एक अत्याधुनिक एम4 कर्बाइन भी बरामद की गई है, जिससे उसके किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की मंशा की पुष्टि होती है। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से इलाके में संभावित बड़े हमले को टाल दिया गया।

खुफिया सूचना के आधार पर ऑपरेशन

जानकारी के मुताबिक, पिछले कई महीनों से सुरक्षाबल कठुआ जिले के पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में आतंकियों के सफाये के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। इसी कड़ी में सुरक्षाबलों को खुफिया सूचना मिली थी कि जैश-ए-मोहम्मद का एक पाकिस्तानी आतंकी बिलावर के डुग्गेनी ब्लॉक में सक्रिय है। सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के साथ मिलकर इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया।

ग्रामीण के घर पहुंचा आतंकी

तलाशी अभियान के दौरान आतंकी पटोदी गांव में एक ग्रामीण के घर भोजन लेने पहुंचा। इसी दौरान वहां मौजूद सुरक्षाबलों पर उसकी नजर पड़ गई। खुद को घिरता देख आतंकी ने अचानक सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी तत्काल मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद आतंकी को मार गिराया गया। मुठभेड़ के दौरान किसी भी सुरक्षाकर्मी या नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।

बारिश के बीच भी जारी तलाशी अभियान

मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। भारी वर्षा के बावजूद सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह आशंका बनी हुई है कि आतंकी का कोई सहयोगी या अन्य आतंकी आसपास के जंगलों में छिपा हो सकता है। इसके साथ ही इलाके में सक्रिय आतंकी नेटवर्क, सीमा पार से घुसपैठ के संभावित रास्तों और स्थानीय मददगारों की भी गहन जांच की जा रही है।

आईजीपी जम्मू और सेना की पुष्टि

आईजीपी जम्मू भीम सेन टूटी और सेना की राइजिंग स्टार कोर ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी आतंकी के मारे जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि फिलहाल क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी है और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

पहले भी मुठभेड़ों में बच निकल चुके थे आतंकी

गौरतलब है कि बिलावर क्षेत्र में यह पहली घटना नहीं है। करीब एक महीने पहले भी उज्ज दरिया के साथ लगते कमांड इलाके में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसके बाद लोहड़ी के दिन नजोत बाथर के जूठा इलाके में भी फायरिंग की घटना सामने आई थी। हालांकि, दोनों मौकों पर आतंकी अंधेरे और दुर्गम भूगोल का फायदा उठाकर भाग निकलने में सफल रहे थे।

आतंकी गतिविधियों का पुराना रूट रहा है इलाका

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पटोदी पंचायत उज्ज दरिया के साथ लगती है और यह इलाका लंबे समय से आतंकियों के मूवमेंट का पुराना रूट रहा है। पहाड़ी इलाके, घने जंगल और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सापेक्षिक निकटता के चलते आतंकी यहां छिपने और आवाजाही के लिए इस क्षेत्र का इस्तेमाल करते रहे हैं।

इसी वजह से पिछले कुछ महीनों से सुरक्षाबलों ने इस पूरे बेल्ट में निगरानी और तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

आतंक के खिलाफ अभियान रहेगा जारी

सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कठुआ और आसपास के इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक क्षेत्र को पूरी तरह आतंकियों से मुक्त नहीं कर दिया जाता। उन्होंने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षाबलों को देने की अपील की है।

कठुआ के बिलावर में जैश के पाकिस्तानी आतंकी का मारा जाना सुरक्षाबलों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का परिणाम माना जा रहा है, जिससे एक बार फिर यह संदेश गया है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है।

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