इराकी के सीने में डॉक्टरों ने धड़काया कृत्रिम दिल
एक खतरनाक स्थानीय आतंकवादी संगठन द्वारा अपहरण और फिरौती मांगने की कोशिश में घायल हुआ 51 वर्षीय इराकी व्यक्ति भारत से धड़कते हुए दिल के साथ स्वदेश लौटा है।
नई दिल्ली| एक खतरनाक स्थानीय आतंकवादी संगठन द्वारा अपहरण और फिरौती मांगने की कोशिश में घायल हुआ 51 वर्षीय इराकी व्यक्ति भारत से धड़कते हुए दिल के साथ स्वदेश लौटा है। अपने शरीर में सात गोलियों की अपने देश और भारत में कई सर्जरी के बाद हनी जवाद मोहम्मद अब स्वस्थ जिंदगी जी रहे हैं।
एक आतंकवादी संगठन ने हनी का अपहरण किया था। कैद से बचने की कोशिश करते समय उन्हें कई बार गोली मारी गई थी। आतंकवादियों ने उन्हें मरा हुआ समझ कर छोड़ दिया था। वहां से बचकर हनी ने अपना इलाज कराया।
सर्जरी के कारण उनका दिल बहुत कमजोर हो गया था जिसे डॉक्टरों ने प्रत्यारोपित करने के लिए कहा था। हनी को भारत के स्वास्थ्य सुविधाओं पर भरोसा था क्योंकि वे यहां पहले भी सर्जरी करा चुके थे।
उनका ऑपरेशन बीएलके हार्ट सेंटर की कार्डियो थोरेकिक एंड वैस्कुलर सर्जरी सीटीवीएस टीम ने किया जिसका नेतृत्व सीटीवीएस के चेयरमैन और हेड ऑफ डिपार्टमेंट ने किया और एक कृत्रिम दिल लगाया। छह घंटे लंबी सर्जरी में तीन सर्जन समेत विभिन्न विभागों के 12 विशेषज्ञ शामिल हुए।
हनी को हार्ट-लेफ्ट-वेंट्रिकल असिस्टेंस डिवाइस (एलवीएडी) की सलाह दी गई जिसे आमतौर पर कृत्रिम दिल के रूप में जाना जाता है। वह एक कृत्रिम दिल के साथ 28 जुलाई को अपने देश इराक वापस लौट गए। यहां उनका दिल सीटीवीएस बीएलके हार्ट सेंटर के चेयरमैन और एचओडी डॉ. अजय कौल के नेतृत्व में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया।
हनी का कहना है, "जब मुझे यह पता चला कि मेरा दिल बेहद कमजोर है और उसे तत्काल इलाज की जरूरत है, तो मैंने इलाज के लिए तुरंत भारत जाने का फैसला किया। एलवीएडी ने मुझे 10-12 साल के लिए जिंदा रहने की आस दे दी है।"
अजय कौल ने बताया, "हनी हमारे पास एक टर्मिनल दिल की स्थिति (कार्डियोमायोपैथी) के साथ आए थे। उन्हें अपहरण के दौरान गोली से घाव लगे थे। हमें पता चला कि उनका दिल बहुत कमजोर है और वह एक प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मगर डोनर न मिलने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था।"