निवेश प्रस्ताव को लग रहा पलीता
सपा सरकार ने 2012 में जेवर में प्रस्तावित एयरपोर्ट को निरस्त कर दिया था ओर मास्टर प्लान में आरक्षित जमीन को कृषि के लिए दिखा दिया था
ग्रेटर नोएडा। सपा सरकार ने 2012 में जेवर में प्रस्तावित एयरपोर्ट को निरस्त कर दिया था ओर मास्टर प्लान में आरक्षित जमीन को कृषि के लिए दिखा दिया था। इसके बाद भी यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने 2013 में दयानतपुर गांव में किसानों से सीधे जमीन खरीद ली। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर जब जेवर में एयरपोर्ट बनाने का फैसला लिया। केंद्र सरकार ने इसे हरी झंडी मिल गई।
प्राधिकरण के सीईओ की तरफ से एयरपोर्ट को लेकर जमीन अधिग्रहण प्रस्ताव की पत्रावाली मांगी गई तो भूलेख विभाग यह छिपा गया कि कोई जमीन नहीं खरीदी गई। प्राधिकरण ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी डा. अरूणवीर सिंह ने शुक्रवार को जब भूलेख विभाग का औचक निरीक्षण किया और फाइल देखी तब पता चला कि दयानतपुर में 2013 में जमीन खरीदी जा चुकी है। इस पर सीईओ ने ओएसडी एके तिवारी को इसकी जांच कर दो दिन में रिपोर्ट देने को कहा है, साथ ही तहसीलदार संतदास पंवार के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देष दिया है।
भूलेख विभाग के तहसीदार व अधिकारी प्रदेश सरकार के निवेश प्रस्ताव को भी पलीता लगा रहे हैं। औद्योगिक सेक्टर-32,33 में सीईओ ने मुरादगढी व चकबीरमपुर की जमीन दो माह में खरीदने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद भूलेख विभाग निर्धारित जमीन नहीं खरीद पाया। इस पर सीईओ ने नाराजगी जाहिर करते हुए एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। औद्योगिक योजना के तहत प्राधिकरण ने 2012 में कुरैब गांव के सुरेशपाल की 2863 हेक्टयर जमीन सीधे खरीदे था। जिसमें भूलेख विभाग ने सुरेष पाल को 0.1846 जमीन अधिक खरीद ली और उसका 21,19,500 रूपये का मुआवजा भी दे दिया।
बाद में भूलेख विभाग को पता चला कि सुरेश पाल को अधिक मुआवजा दे दिया गया। उसे अधिक मुआवजा का पैसा जमा करने के लिए नोटिस जारी किया। सुरेष पाल ने दस मार्च 2016 को उठाया गया अधिक मुआवजा प्राधिकरण के एचडीएफसी खाते में जमा कर दिया। सीईओ ने जांच के दौरान पाया कि 20 दिसंबर 2012 से दस मार्च 2016 के बीच सुरेष पाल से मुआवजा का ब्याज नहीं वसूला गया। प्राधिकरण के अधिकारी व कर्मचारी इस फाइल को दबा रखा। इस पर सीईओ ने ब्याज वसूलने तथा संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ जांच कराने का निर्देश दिया है।
औचक निरीक्षण के दौरान लेखपाल की आलमारी से निलौनी शाहपुर की 24 पत्रावलिंया मिली। जिसमें गांव के एक ही किसान की अलग-अलग मुआवजे की कई फाइल बनाई गई थी। इस पर सीईओ ओएसडी को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। सीईओ को तहसीलदार संतदास पंवार की आलमारी से 23 फरवरी 2018 को जारी दो चेक मिले।
इस पर सीईओ ने तहसीलदार से जवाब मांगा है।
प्राधिकरण ने 2013 में सीधे जमीन ,खरीदने के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किया था। जांच के दौरान तहसीलदार संतदास पंवार के आलमारी से कई ऐसी फाइल मिली जिसमें वह 2013 में प्रकाषित विज्ञापनों के आधार पर जमीन खरीद रहा था। जबकि 2015-16 में भू-अर्जन की नई नीति जारी हो चुकी थी। इस पर ओएसडी एके तिवारी को जांच कर इसकी रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर देने को कहा है। तहसीलदार से इस पर जवाब मांगा गया है।