US Iran War: अमेरिकी F-35 लाइटनिंग विमान पर हमले का दावा, आपात लैंडिंग की पुष्टि

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मिसाइल हमले के बाद संबंधित एफ-35 को आपात स्थिति में लैंडिंग करनी पड़ी, लेकिन विमान और पायलट दोनों सुरक्षित हैं।

Update: 2026-03-20 07:29 GMT

तेहरान/वॉशिगटन। US F 35 Lightning Aircraft Attack: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव एक नए स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है। गुरुवार तड़के ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने मध्य ईरान के हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है। आईआरजीसी के अनुसार, इस हमले के बाद विमान के क्रैश होने की “बहुत ज्यादा संभावना” है। हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मिसाइल हमले के बाद संबंधित एफ-35 को आपात स्थिति में लैंडिंग करनी पड़ी, लेकिन विमान और पायलट दोनों सुरक्षित हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का बयान

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि एफ-35 विमान ईरान के ऊपर एक मिशन पर था। उन्होंने बताया कि हमले के बाद विमान को सुरक्षित उतार लिया गया और पायलट की स्थिति स्थिर है। हॉकिन्स ने यह भी कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नुकसान की वास्तविक स्थिति क्या है। उनका बयान इस ओर इशारा करता है कि घटना गंभीर जरूर है, लेकिन ईरान के दावों की पूरी पुष्टि नहीं हुई है।

एफ-35: दुनिया का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान

एफ-35 लाइटनिंग II को दुनिया के सबसे आधुनिक और महंगे लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। इसकी कीमत 100 मिलियन डॉलर (करीब 800 करोड़ रुपये) से अधिक बताई जाती है। यह विमान अपनी स्टील्थ तकनीक, अत्याधुनिक सेंसर और मल्टी-रोल क्षमताओं के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान का दावा पूरी तरह सच साबित होता है, तो यह न केवल तकनीकी बल्कि रणनीतिक रूप से भी अमेरिका के लिए बड़ा झटका होगा।

युद्ध में नुकसान को लेकर विरोधाभासी दावे

ईरान और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संघर्ष की शुरुआत से अब तक अमेरिका के कई सैन्य संसाधन प्रभावित हुए हैं।

- बताया जा रहा है कि अब तक 16 अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हो चुके हैं।

- करीब 10 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी मार गिराए गए हैं।

- महंगे ड्रोन, रडार सिस्टम और रिफ्यूलिंग टैंकरों को भी नुकसान पहुंचा है।

- ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका और इजरायल के 125 से अधिक ड्रोन नष्ट किए हैं।

फ्रेंडली फायर और अन्य घटनाएं

रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध के दौरान कुछ घटनाएं ऐसी भी हुई हैं जो सीधे दुश्मन के हमले से जुड़ी नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर, कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा गलती से अमेरिका के तीन एफ-15 ईगल विमानों को मार गिराने की बात सामने आई है। हालांकि, इन विमानों में सवार सभी छह क्रू सदस्य सुरक्षित बच गए। इसके अलावा, पिछले सप्ताह इराक में एक अमेरिकी केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की भी खबर है, जिसमें छह लोगों की मौत हुई। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि यह दुर्घटना किसी हमले का परिणाम नहीं थी।

अमेरिका का दावा, हम जीत रहे हैं

इन तमाम घटनाओं के बावजूद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि अमेरिका इस युद्ध में “निर्णायक रूप से आगे” है। उनके अनुसार, ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम काफी हद तक निष्क्रिय किया जा चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दूसरी ओर ईरान खुद को मजबूत स्थिति में दिखाने की कोशिश कर रहा है। दोनों पक्षों के दावों में अंतर इस संघर्ष को और जटिल बनाता है।

क्षेत्र में सैन्य तैनाती बढ़ी

तनाव को देखते हुए अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओकिनावा से मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और त्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप को तैनात किया जा रहा है। अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को हाल ही में सिंगापुर के पास देखा गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अपने सैन्य संसाधनों को तेजी से सक्रिय कर रहा है।

स्थिति पर बनी हुई है अनिश्चितता

एफ-35 पर हमले के दावे और आपात लैंडिंग की घटना ने इस संघर्ष को और संवेदनशील बना दिया है। एक ओर ईरान इसे अपनी बड़ी सैन्य उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है, तो वहीं अमेरिका नुकसान को सीमित बताते हुए अपनी बढ़त का दावा कर रहा है।

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