बांग्लादेश लौटने की तैयारी में शेख हसीना, बोलीं- लोकतंत्र बहाल होते ही करूंगी वापसी

शेख हसीना ने कहा कि उनकी वापसी किसी तय तारीख पर निर्भर नहीं है। उनके अनुसार, सबसे जरूरी यह है कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक वातावरण दोबारा स्थापित हो, लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिले और राजनीतिक अधिकारों की बहाली हो।;

Update: 2026-05-19 04:22 GMT

नई दिल्‍ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने संकेत दिए हैं कि वह भविष्य में फिर अपने देश लौट सकती हैं। भारत में रह रहीं हसीना ने एक ई-मेल इंटरव्यू में कहा कि उनकी राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और वह लगातार बांग्लादेश के लिए सक्रिय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश छोड़ने का मतलब यह नहीं है कि उन्होंने राजनीति या जनता से दूरी बना ली है। 2024 में छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद सत्ता से हटने के बाद से शेख हसीना भारत में रह रही हैं। इस दौरान उनकी पार्टी अवामी लीग पर बांग्लादेश में प्रतिबंध लगाया गया और इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें मौत की सजा भी सुनाई। बावजूद इसके हसीना ने कहा कि वह हालात बदलने का इंतजार कर रही हैं।

लोकतांत्रिक माहौल बनने के बाद होगी वापसी

शेख हसीना ने कहा कि उनकी वापसी किसी तय तारीख पर निर्भर नहीं है। उनके अनुसार, सबसे जरूरी यह है कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक वातावरण दोबारा स्थापित हो, लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिले और राजनीतिक अधिकारों की बहाली हो। उन्होंने कहा कि कानून का शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती केवल उनकी व्यक्तिगत वापसी के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य के लिए आवश्यक है। हसीना का कहना है कि जब देश में सामान्य राजनीतिक माहौल बनेगा, तब वह और उनकी पार्टी के अन्य नेता जनता के बीच लौटेंगे।

‘अवामी लीग को खत्म नहीं किया जा सकता’

पूर्व प्रधानमंत्री ने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अवामी लीग केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि बांग्लादेश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी पार्टी है। उनके मुताबिक किसी सरकारी आदेश या प्रतिबंध से इसे समाप्त नहीं किया जा सकता। हसीना ने कहा कि अगर अवामी लीग को दबाकर खत्म करना संभव होता, तो शायद बांग्लादेश का निर्माण ही नहीं हो पाता। उन्होंने दावा किया कि लाखों समर्थक और हजारों कार्यकर्ता आज भी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार अवामी लीग की लोकप्रियता से डरती है, इसलिए पार्टी पर प्रतिबंध लगाया गया। उनके अनुसार, राजनीतिक दबाव और विरोधियों की रणनीति के बावजूद पार्टी टूटने वाली नहीं है।

खुद पर हुए हमलों का किया जिक्र

इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में कई बार जानलेवा हमले हुए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने दावा किया कि उन पर अब तक 19 बार हमले किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हमेशा लोकतंत्र और विकास की राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश की। उनका मानना है कि बांग्लादेश की जनता सच जानती है और सही समय आने पर फैसला भी करेगी।

मुहम्मद यूनुस सरकार पर लगाए आरोप

शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान प्रशासन ने अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की नीति अपनाई है। हसीना के अनुसार, करीब 600 नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, जबकि 1.5 लाख से अधिक लोगों को झूठे मामलों में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं को अपनी जान बचाने के लिए देश छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे और लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल होगी, अवामी लीग के सभी नेता और कार्यकर्ता वापस लौटेंगे।

अर्थव्यवस्था को लेकर भी साधा निशाना

बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी शेख हसीना ने मौजूदा सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में देश तेजी से विकास कर रहा था और कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा था। हसीना ने पद्मा ब्रिज, रूपपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना और मातारबाड़ी बंदरगाह जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने बांग्लादेश को नई आर्थिक दिशा दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था संकट में पहुंच गई है। उनके मुताबिक, राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक फैसलों की वजह से निवेश, रोजगार और विकास प्रभावित हुआ है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी बोलीं

भारत के साथ संबंधों को लेकर शेख हसीना ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते ऐतिहासिक और भावनात्मक हैं। उन्होंने याद दिलाया कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता की लड़ाई में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। उन्होंने कहा कि भारत केवल पड़ोसी देश नहीं, बल्कि बांग्लादेश के इतिहास से जुड़ा साझेदार है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से कुछ राजनीतिक और कट्टरपंथी समूह भारत विरोधी भावना को बढ़ावा देकर राजनीति करते रहे हैं। हसीना का कहना है कि मौजूदा अंतरिम सरकार ने भी इसी रणनीति को आगे बढ़ाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में दोनों देशों के संबंध फिर मजबूत होंगे और क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

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