फ्रांस में फिर आमने-सामने हो सकते हैं मोदी और ट्रंप, जी-7 सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक की तैयारी
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में हुई थी। उसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। व्यापारिक मुद्दों, आयात शुल्क और रूस से तेल खरीद जैसे मामलों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी सामने आए।;
पेरिस। G7 Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अगले महीने फ्रांस में अहम द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। फ्रांस में 15 से 17 जून के बीच जी-7 देशों का शिखर सम्मेलन आयोजित होना है, जिसमें भारत को विशेष आमंत्रित देश के तौर पर बुलाया गया है। माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका दोनों इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। कोशिश यह है कि बातचीत सिर्फ औपचारिक न रहे, बल्कि व्यापार, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर ठोस नतीजे भी सामने आएं।
फरवरी 2025 के बाद पहली आमने-सामने बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में हुई थी। उसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। व्यापारिक मुद्दों, आयात शुल्क और रूस से तेल खरीद जैसे मामलों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी सामने आए। इसी वजह से अब फ्रांस में प्रस्तावित बैठक को संबंधों में नई ऊर्जा भरने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। दोनों पक्ष चाहते हैं कि शीर्ष स्तर पर संवाद बढ़े और लंबित मुद्दों पर आगे बढ़ने का रास्ता निकले।
पिछले साल नहीं हो पाई थी मुलाकात
पिछले वर्ष जी-7 सम्मेलन कनाडा में आयोजित हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने हिस्सा लिया था। हालांकि उस दौरान ट्रंप सम्मेलन समाप्त होने से पहले ही रवाना हो गए थे, जिसके कारण दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो सकी थी। बाद में ट्रंप ने मोदी को अमेरिका आने का निमंत्रण भी दिया था, लेकिन भारतीय पक्ष ने कार्यक्रम तय नहीं किया। इसके बाद कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन के बयानों और नीतियों ने नई दिल्ली की चिंता बढ़ाई।
व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर बढ़ी दूरी
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की चर्चा, रूस से तेल खरीद पर दबाव और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति का असर भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ा। दोनों देशों के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जी-7 के दौरान संभावित मोदी-ट्रंप बैठक में व्यापार समझौते को लेकर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी पर भी फोकस रहेगा।
मार्को रूबियो की भारत यात्रा अहम
इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की 23 से 26 मई तक होने वाली भारत यात्रा को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा होगी। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, वह नई दिल्ली के अलावा कोलकाता, आगरा और जयपुर भी जाएंगे। भारत दौरे के दौरान रूबियो ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और क्षेत्रीय रणनीतिक मुद्दों पर भारतीय नेताओं के साथ बातचीत करेंगे। माना जा रहा है कि उनकी यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य मोदी और ट्रंप की संभावित बैठक का एजेंडा तैयार करना भी है।
जयशंकर और मोदी से करेंगे मुलाकात
रूबियो अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सहयोग और रक्षा साझेदारी प्रमुख विषय रहेंगे। दोनों देशों के बीच तकनीक, सेमीकंडक्टर और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। अमेरिका चाहता है कि भारत इंडो-पैसिफिक रणनीति में और बड़ी भूमिका निभाए।
क्वाड बैठक पर भी नजर
26 मई को नई दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि भारत और अमेरिका ने आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन जापान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि उनके विदेश मंत्री इस बैठक में शामिल होंगे। यदि यह बैठक होती है, तो इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और चीन से जुड़े रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
वैश्विक तनाव के बीच बढ़ा समन्वय का महत्व
रूबियो की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और दुनिया कई आर्थिक व सामरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे माहौल में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक समन्वय को बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में होने वाली कूटनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय कर सकती हैं। फ्रांस में संभावित मोदी-ट्रंप मुलाकात पर अब पूरी दुनिया की नजर रहेगी।