बीजिंग में पुतिन-जिनपिंग की अहम मुलाकात, ईरान युद्ध से लेकर ऊर्जा साझेदारी तक कई मुद्दों पर चर्चा; 40 समझौतों पर साइन होंगे

बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में शी जिनपिंग ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। दोनों नेता रेड कार्पेट पर साथ चलते नजर आए, जबकि सैन्य बैंड ने रूस और चीन के राष्ट्रगान बजाए। इस दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहे।;

Update: 2026-05-20 06:17 GMT

बीजिंग: Putin Beijing Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बुधवार को बीजिंग में अहम बैठक हुई। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने वैश्विक तनाव, ईरान युद्ध, यूक्रेन संकट, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक ऐसे समय हुई है जब दुनिया में कई मोर्चों पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और रूस-चीन की बढ़ती नजदीकियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में शी जिनपिंग ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। दोनों नेता रेड कार्पेट पर साथ चलते नजर आए, जबकि सैन्य बैंड ने रूस और चीन के राष्ट्रगान बजाए। इस दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहे।

पुतिन बोले- बाहरी दबाव के बावजूद रिश्ते मजबूत

बैठक की शुरुआत में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, चाहे उन पर कितना भी बाहरी दबाव क्यों न हो। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और राजनीतिक सहयोग पहले से कहीं अधिक गहरा हुआ है। पुतिन के मुताबिक, रूस और चीन एक-दूसरे की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच करीबी तालमेल अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि दोनों देश ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

शी जिनपिंग ने युद्धविराम की जरूरत बताई

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी रूस के साथ संबंधों को “अडिग” और “रणनीतिक” बताया। उन्होंने कहा कि कठिन अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद दोनों देशों के बीच राजनीतिक भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। जिनपिंग ने ईरान को लेकर चल रहे संघर्ष पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध को बढ़ाना उचित नहीं है और तत्काल युद्धविराम की दिशा में कदम उठाने चाहिए। उनके अनुसार, वैश्विक संकटों का समाधान सैन्य टकराव नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति से निकाला जाना चाहिए। चीन लंबे समय से खुद को वैश्विक विवादों में मध्यस्थ और संतुलनकारी शक्ति के रूप में पेश करता रहा है। ऐसे में जिनपिंग का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

40 समझौतों पर हस्ताक्षर की तैयारी

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन इस दौरे में बड़े कारोबारी और सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन पहुंचे हैं। क्रेमलिन ने जानकारी दी है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच करीब 40 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इन समझौतों में ऊर्जा, व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, तकनीक और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम क्षेत्र शामिल हैं। रूस और चीन दोनों इस साझेदारी को लंबे समय की रणनीतिक भागीदारी के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस अब एशियाई बाजारों, खासकर चीन, पर अधिक निर्भर हो गया है।

चीन बना अहम साझेदार

यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में रूस की गैस बिक्री में भारी गिरावट आई है। कई यूरोपीय देशों ने रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। ऐसे में चीन रूस के लिए सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार बनकर उभरा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच गैस पाइपलाइन परियोजनाओं और ऊर्जा निर्यात को लेकर भी चर्चा हुई। रूस चाहता है कि चीन के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते किए जाएं ताकि पश्चिमी प्रतिबंधों के असर को कम किया जा सके।

अमेरिका और रूस के बीच संतुलन साधने की कोशिश

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि पुतिन का यह दौरा चीन की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अमेरिका और रूस दोनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े तनाव के बीच चीन खुद को एक ऐसी वैश्विक शक्ति के रूप में पेश करना चाहता है, जो बातचीत और सहयोग के जरिए अंतरराष्ट्रीय संकटों को संभाल सकती है। हाल के वर्षों में चीन ने अमेरिका के साथ भी कई स्तरों पर बातचीत जारी रखी है, जबकि दूसरी ओर रूस के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत होती गई है।

पुतिन और जिनपिंग की मजबूत राजनीतिक साझेदारी

रूस और चीन के शीर्ष नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध भी काफी मजबूत माने जाते हैं। पुतिन और शी जिनपिंग अब तक 40 से अधिक बार मुलाकात कर चुके हैं। 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की की थी। वहीं पुतिन भी कई बार अपनी शुरुआती विदेश यात्राओं में चीन को प्राथमिकता देते रहे हैं। दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे को करीबी मित्र और रणनीतिक साझेदार बता चुके हैं। फरवरी 2026 में हुई वीडियो बैठक के दौरान जिनपिंग ने पुतिन को चीन आने का निमंत्रण दिया था, जिसे रूसी राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया था।

बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत

रूस और चीन दोनों लंबे समय से “मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर” यानी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि दुनिया की शक्ति केवल एक देश के हाथ में नहीं होनी चाहिए, बल्कि कई बड़े देशों के बीच संतुलित रूप से बंटी होनी चाहिए। दोनों देश BRICS, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पश्चिमी प्रभाव को चुनौती देने और वैकल्पिक वैश्विक व्यवस्था की बात करते रहे हैं। बीजिंग में हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। ऐसे में रूस और चीन की बढ़ती साझेदारी आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकती है।

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