न्यूयार्क: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य तैयारियों को और तेज कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही सुरक्षित करने और संभावित जमीनी कार्रवाई के मद्देनजर अमेरिका ने अपने सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ा दी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यूएसएस बॉक्सर सहित तीन एंफीबियस युद्धपोत और करीब 2,500 मरीन सैनिकों को क्षेत्र की ओर भेजा गया है।
होर्मुज बना वैश्विक चिंता का केंद्र
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। हालिया तनाव और हमलों के खतरे के कारण यहां हजारों तेल टैंकर फंस गए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक उछाल देखा गया है। इस स्थिति ने न केवल ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, बल्कि कई देशों में तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता भी बढ़ा दी है।
नाटो के पीछे हटने से अमेरिका पर दबाव
सूत्रों के अनुसार, नाटो देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के प्रयासों में सीधे शामिल होने से इनकार कर दिया है। इसके बाद यह मुद्दा अमेरिका के लिए रणनीतिक और प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे में अमेरिका अकेले ही स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है।
खार्ग द्वीप पर कब्जे की अटकलें
वर्तमान हालात के बीच यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका ईरान के खार्ग द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति अपना सकता है। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार किसी भी जमीनी कार्रवाई से इनकार करते रहे हैं, लेकिन उनके पिछले फैसलों को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थिति अप्रत्याशित रूप ले सकती है।
तटीय अभियानों के लिए तैयार मरीन बल
अमेरिका द्वारा भेजे गए एंफीबियस युद्धपोतों के साथ बड़ी संख्या में नौसैनिक और मरीन बल भी शामिल हैं। इन सैनिकों को जरूरत पड़ने पर तटीय अभियानों और सीमित जमीनी ऑपरेशन में लगाया जा सकता है। अमेरिकी सूत्रों का कहना है कि यह तैनाती सामान्य समय से पहले की गई है, ताकि ईरान के दबाव को जल्दी कम किया जा सके और होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित बनाया जा सके।
ईरानी गतिविधियों पर पहले से हमले
इससे पहले भी अमेरिकी सेना ने होर्मुज क्षेत्र में सक्रियता दिखाते हुए ईरानी ड्रोन, तेज गति वाली नौकाओं और बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों को निशाना बनाया है। इन हमलों का उद्देश्य समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखना और संभावित खतरों को खत्म करना बताया गया है। अमेरिका का कहना है कि उसका मुख्य लक्ष्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के इस महत्वपूर्ण मार्ग को फिर से सामान्य करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो।
वैश्विक असर और आगे की राह
होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। तेल की कीमतों में उछाल से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं ऊर्जा संकट की आशंका भी गहराती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती और संभावित जमीनी कार्रवाई की अटकलें इस संकट को और जटिल बना रही हैं।