अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा वार्ता बेनतीजा, ईरान परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध कायम, ट्रंप नाखुश

मध्यस्थता कर रहे ओमान ने बातचीत को “सकारात्मक” बताया है, लेकिन दोनों देशों के बीच मौजूदा मतभेद दूर होने के स्पष्ट संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बरकरार है और संभावित सैन्य टकराव की आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

Update: 2026-02-28 02:46 GMT

जिनेवा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हुई अहम वार्ता बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई। हालांकि मध्यस्थता कर रहे ओमान ने बातचीत को “सकारात्मक” बताया है, लेकिन दोनों देशों के बीच मौजूदा मतभेद दूर होने के स्पष्ट संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बरकरार है और संभावित सैन्य टकराव की आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। वार्ता ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात पहले से संवेदनशील हैं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा हुआ है।

ट्रंप बोले, ईरान के रुख से खुश नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिनेवा वार्ता के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह बातचीत में ईरान के रुख से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह भविष्य की वार्ताओं में सकारात्मक परिणाम की उम्मीद रखते हैं। ट्रंप का बयान संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल कूटनीतिक रास्ता खुला रखना चाहता है, लेकिन ईरान की ओर से अपेक्षित लचीलापन नहीं दिखने से वाशिंगटन में असंतोष है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से औपचारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बातचीत अभी संवेदनशील चरण में है।

बातचीत जारी रखने पर सहमति

ओमान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बूसईदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। उनके अनुसार, जिनेवा में हुई बातचीत रचनात्मक रही और संवाद के लिए दरवाजे खुले हैं। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि अगले सप्ताह ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में फिर से मुलाकात कर सकते हैं। अल्बूसईदी ने शुक्रवार को वाशिंगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की, ताकि वार्ता की दिशा पर चर्चा की जा सके। हालांकि, वार्ता से जुड़े ठोस बिंदुओं और संभावित समझौते की रूपरेखा पर किसी भी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से विस्तार से जानकारी नहीं दी है।

कुछ सहमति, कुछ असहमति

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्वीकार किया कि कुछ मुद्दों पर प्रगति हुई है, लेकिन कई अहम बिंदुओं पर मतभेद कायम हैं। उन्होंने कहा, “हम कुछ बिंदुओं पर सहमति बनाने में सफल रहे हैं, लेकिन कुछ विषयों पर हमारी असहमति बरकरार है।” अरागची के बयान से संकेत मिलता है कि तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम की सीमा, निरीक्षण व्यवस्था और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दों पर अब भी गहरे मतभेद हैं।

बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा कदम

जिनेवा वार्ता के समानांतर क्षेत्र में तनाव के संकेत भी दिखे। अमेरिका ने यरुशलम स्थित अपने दूतावास से कम जरूरी कर्मचारियों और कुछ अमेरिकी नागरिकों को इजरायल छोड़ने की सलाह दी है। इसे संभावित सुरक्षा जोखिमों के मद्देनजर एहतियाती कदम माना जा रहा है। चीन ने भी इजरायल में रह रहे अपने नागरिकों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। वहीं ब्रिटेन ने तेहरान स्थित अपना दूतावास अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और अपने कर्मियों को वापस बुला लिया है। इन कदमों से स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्रीय स्थिति को गंभीरता से देख रहा है।

क्या टला अमेरिकी हमले का खतरा?

हालांकि वार्ता में कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ, लेकिन बातचीत का जारी रहना फिलहाल संभावित सैन्य कार्रवाई के खतरे को कुछ समय के लिए टालता हुआ दिख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि कूटनीतिक चैनल खुले रहने से तत्काल टकराव की संभावना कम होती है। हाल के महीनों में अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ी चेतावनी दी थी। वाशिंगटन का आरोप है कि तेहरान अपनी परमाणु क्षमताओं को इस स्तर तक बढ़ा रहा है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें विएना बैठक पर

अब सबकी नजरें प्रस्तावित विएना बैठक पर टिकी हैं। यह बैठक तय करती है कि क्या दोनों देश किसी साझा रास्ते की ओर बढ़ पाएंगे या गतिरोध और गहरा जाएगा। यूरोपीय देशों ने भी संयम और संवाद पर जोर दिया है। उनका मानना है कि परमाणु समझौते की बहाली या किसी नए ढांचे पर सहमति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है।

चुनौतीपूर्ण राह

ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध, यूरेनियम संवर्धन की सीमा, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में हैं। इन पर सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों में घरेलू दबाव मौजूद हैं। अमेरिका में सख्त रुख अपनाने की मांग करने वाले धड़े सक्रिय हैं, जबकि ईरान में भी पश्चिमी दबाव के आगे झुकने को लेकर आंतरिक बहस जारी है।

हालात नाजुक

जिनेवा में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता भले ही किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंची, लेकिन संवाद जारी रखने की सहमति ने कूटनीतिक उम्मीदों को जिंदा रखा है। क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक चिंताओं के बीच विएना में संभावित अगली बैठक निर्णायक साबित हो सकती है। फिलहाल हालात नाजुक हैं। न तो गतिरोध पूरी तरह टूटा है और न ही टकराव की आशंकाएं खत्म हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कूटनीति जीतती है या तनाव और गहराता है।

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