वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका की घोषित नाकाबंदी को बड़ा झटका लगा है। नाकाबंदी लागू होने के 24 घंटे के भीतर ही चीन का एक मालवाहक जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजर गया। यह घटना न सिर्फ अमेरिकी रणनीति पर सवाल खड़े करती है, बल्कि क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को भी उजागर करती है।
नाकाबंदी के बीच चीनी जहाज की आवाजाही
रिपोर्ट्स के मुताबिक, “रिच स्टारी” नाम का चीनी मेथनॉल टैंकर ईरान की अनुमति लेकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर गया। इस जहाज पर करीब 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लदा था, जिसे संयुक्त अरब अमीरात के हमरिया पोर्ट से लोड किया गया था। सीएनएन के अनुसार, सोमवार (13 अप्रैल) को यह जहाज ईरान के केशम द्वीप के पास पहुंचा, जहां इसे कुछ समय के लिए रोका गया। इसके बाद दूसरे प्रयास में इसे सुरक्षित तरीके से स्ट्रेट पार करा दिया गया। मंगलवार सुबह यह टैंकर ओमान की खाड़ी में देखा गया—ठीक उसी क्षेत्र में, जहां अमेरिका ने अपनी नौसैनिक तैनाती के जरिए नाकाबंदी लागू करने का दावा किया है।
पहले से प्रतिबंधित जहाज पर भी नहीं हुई कार्रवाई
दिलचस्प बात यह है कि “रिच स्टारी” टैंकर पर पहले से अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए थे। इसके बावजूद अमेरिकी नौसेना इस जहाज को रोकने या उस पर कार्रवाई करने में असफल रही। इससे नाकाबंदी की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मरीन ट्रैफिक डेटा के अनुसार, इस टैंकर का पहले नाम “फुल स्टार” था और यह हांगकांग के झंडे के तहत संचालित होता था, लेकिन अब यह चीनी ध्वज के साथ चल रहा है।
दो प्रयासों के बाद पार हुआ होर्मुज
रिपोर्ट के अनुसार, यह टैंकर पहले प्रयास में होर्मुज पार करने में सफल नहीं हुआ था। हालांकि, बाद में ईरान की मदद से इसे दोबारा प्रयास कराया गया और यह सफलतापूर्वक इस रणनीतिक जलमार्ग को पार कर गया। जहाज फिलहाल चीन के एक बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है।
चीन पहले ही दे चुका है चेतावनी
इस घटनाक्रम से पहले चीन ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी थी। चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा था कि ईरान के साथ चीन के व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं और किसी भी बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था, “हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे देश हमारे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। होर्मुज स्ट्रेट चीन के लिए खुला है।” चीन का यह रुख इस घटना के बाद और अधिक मजबूत नजर आ रहा है।
ईरान की मदद का प्रस्ताव
इस बीच ईरान ने भारत के लिए भी एक अहम संदेश दिया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकालने में मदद करेंगे और इस संबंध में बातचीत जारी है। हालांकि, ईरान ने साथ ही यह भी चेतावनी दी कि यदि उसके बंदरगाहों पर कोई हमला हुआ, तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर का कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा।
अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समर्थन की कमी
अमेरिका की इस नाकाबंदी को वैश्विक स्तर पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया है। कई यूरोपीय देशों ने इस अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है। वहीं, एक ईरानी टैंकर ने भी इस नाकाबंदी को चुनौती देते हुए मार्ग पार किया, जिससे अमेरिका की स्थिति और कमजोर होती दिख रही है।
ईरान में अमेरिका-इजराइल के खिलाफ प्रदर्शन
ईरान की राजधानी तेहरान में भी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों और धमकियों को “खोखला” बताया। एक प्रदर्शनकारी जहरा ने कहा कि अमेरिका पहले भी हमलों की धमकी देता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ। वहीं मिलाद नाम के एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि ये धमकियां अमेरिका की कमजोरी को दर्शाती हैं।
भारी सैन्य तैनाती के बावजूद चुनौती
अमेरिका ने होर्मुज के बाहर अपनी नाकाबंदी को लागू करने के लिए 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए हैं। इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन और कई डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और अरब सागर में तैनात हैं। अमेरिकी सेंटकॉम के अनुसार, जो भी जहाज होर्मुज से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे रोका जा सकता है या उस पर कार्रवाई की जा सकती है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति बताया है, ताकि वह परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत की टेबल पर आए।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक बाजार और ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है। चीनी टैंकर का इस तरह नाकाबंदी के बावजूद गुजरना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और जटिल हो सकता है, और अमेरिका की रणनीति को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।