डील होने ही वाली थी कि..., ईरान ने बताया कहां फेल हुई पाकिस्तान में अमेरिका से बात
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने रविवार को बताया कि लंबी वार्ता के बाद भी किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे। वेंस ने कहा कि 21 घंटे से अधिक समय की कोशिशों के बावजूद दोनों पक्ष मतभेदों की खाई पाट नहीं सके।
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता फेल हो गई थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का दावा है कि डील बस होने ही वाली थी, लेकिन अमेरिका के रुख के कारण नहीं हो सकी। जबकि, अमेरिका का कहना है कि सबसे अहम परमाणु का मुद्दा था, जिसपर सहमति नहीं बन सकी। साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी के आदेश दे दिए हैं। इधर, पाकिस्तान वार्ता आगे भी जारी रखने की बात कह रहा है।
पाकिस्तान में क्या हुआ
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने किया, जबकि अमेरिकी टीम की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की। पीटीआई भाषा के सूत्रों के अनुसार, इसके बाद वार्ता सीधे बातचीत के चरण में पहुंची, जो पाकिस्तानी अधिकारियों की मौजूदगी में करीब ढाई घंटे तक चली। अगले चरण में एक घंटे का विराम लिया गया और दोनों पक्षों की मांगों के तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञ स्तर पर चर्चा की गई।
In intensive talks at highest level in 47 years, Iran engaged with U.S in good faith to end war.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 12, 2026
But when just inches away from "Islamabad MoU", we encountered maximalism, shifting goalposts, and blockade.
Zero lessons earned
Good will begets good will.
Enmity begets enmity.
क्यों नहीं बनी बात
अराघची ने बातचीत को लेकर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने कहा, '47 सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हुई गंभीर बातचीत में, ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ पूरी ईमानदारी से काम किया। लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद समझौते' के बिल्कुल करीब थे, तब हमारे सामने बड़ी-बड़ी मांगें रखी गईं, शर्तें बदली गईं और रास्ते रोके गए। कोई सबक नहीं सीखा गया।'उन्होंने लिखा, 'अच्छाई के बदले अच्छाई मिलती है और दुश्मनी के बदले दुश्मनी।'
अमेरिका का पक्ष
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने रविवार को बताया कि लंबी वार्ता के बाद भी किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे। वेंस ने कहा कि 21 घंटे से अधिक समय की कोशिशों के बावजूद दोनों पक्ष मतभेदों की खाई पाट नहीं सके। उन्होंने कहा, 'हम 21 घंटे से इस पर काम कर रहे हैं और अच्छी खबर यह है कि हमारे बीच कई सार्थक चर्चाएं हुई हैं।' उन्होंने कहा, 'बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।' उन्होंने कहा, 'हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं कि हम किन बातों पर समझौता करने को तैयार हैं और किन पर नहीं।' उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने 'हमारी शर्तों को स्वीकार न करने का विकल्प चुना है।'ट्रंप ने कहा, 'तो, बात यह है कि बैठक अच्छी रही, ज्यादातर बिंदुओं पर सहमति बन गई, लेकिन एकमात्र मुद्दा जो वास्तव में मायने रखता था, यानी परमाणु, उस पर सहमति नहीं बन पाई।'
अब आगे क्या
ट्रंप ने परमाणु हथियारों के मुद्दे पर तेहरान के साथ शांति वार्ता विफल होने के कुछ घंटों बाद घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज मार्ग में जहाजों के प्रवेश या निकास को रोकने के लिए नाकेबंदी शुरू करेगी। ट्रंप ने 'ट्रूथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने अमेरिकी नौसेना को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन सभी जहाजों की पहचान करने और उन्हें रोकने का निर्देश दिया है जिन्होंने ईरान को टोल का भुगतान किया है।