संयुक्त राष्ट्र : अल-कायदा बांग्लादेश में आतंकवादी सेल बनाने की कोशिश कर रहा, जारी की चेतावनी

ढाका, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) बांग्लादेश को आधार बनाकर आतंकवादी सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।;

By :  IANS
Update: 2026-08-14 12:22 GMT

ढाका, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) बांग्लादेश को आधार बनाकर आतंकवादी सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

यह निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र की विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी टीम की 38वीं रिपोर्ट में सामने आया है। यह रिपोर्ट इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति को सौंपी गई है।

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले पर हुआ हमला एक्यूआईएस से जुड़ा था। साथ ही, संगठन द्वारा बांग्लादेश को आतंकवादी नेटवर्क खड़ा करने के आधार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है। इस पृष्ठभूमि में निगरानी टीम ने चेतावनी दी है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का खतरा और अधिक बढ़ गया है।

लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को उस जनविद्रोह के बाद देश छोड़कर निर्वासन में जाना पड़ा था, जिसमें इस्लामवादी तत्वों की प्रमुख भूमिका बताई गई थी। इसके बाद से यह आशंका बढ़ गई है कि आतंकवादी संगठनों को वहां अपनी गतिविधियां फैलाने के लिए अनुकूल जमीन मिल सकती है।

एक्यूआईएस की स्थापना वर्ष 2014 में अल-कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने की थी। रिपोर्ट में कहा गया है, एक्यूआईएस एक बिखरे हुए समूह से विकसित होकर एक क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन का रूप लेता जा रहा है।" इसमें आगे कहा गया कि संगठन ने लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क स्थापित कर लिए हैं तथा अब वह बड़े संगठित ढांचों के बजाय छोटे, विकेंद्रीकृत और बिखरे हुए सेल के माध्यम से काम कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के आकलन में इस घटनाक्रम को दक्षिण एशिया के सुरक्षा माहौल में व्यापक गिरावट से जोड़ा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आतंकवादी खतरे का स्तर कुल मिलाकर लगभग समान बना हुआ है, लेकिन साहेल क्षेत्र और दक्षिण एशिया में इसमें वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमले जारी रहने से क्षेत्रीय तनाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। इसमें तालिबान प्रशासन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को समर्थन जारी रखने का आरोप लगाया गया है। टीटीपी ने पाकिस्तान के खिलाफ हमले बढ़ा दिए हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हुई है।

तालिबान लगातार आतंकवादी संगठनों को शरण देने के आरोपों से इनकार करता रहा है। हालांकि, सदस्य देशों को चिंता है कि यह संघर्ष चरमपंथी संगठनों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में सक्रिय कई आतंकवादी संगठनों की संचालन क्षमता पड़ोसी देशों और मध्य एशिया के लिए लगातार खतरा बनी हुई है। इसमें कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट-खुरासान (आईएस-के) के खिलाफ अभियानों और अन्य संगठनों को नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद तालिबान आतंकवाद की समस्या को पूरी तरह दबाने में सफल नहीं हो पाया है।

एक्यूआईएस इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है, जिसे कई हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। माना जाता है कि एक्यूआईएस के नेता अब भी काबुल में मौजूद हैं और उन्हें कथित रूप से अफगान पहचान पत्र भी जारी किए गए हैं। इससे तालिबान और संगठन के बीच करीबी सहयोग के संकेत मिलते हैं।

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