तेहरान/ न्यूयॉर्क: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ संवाद और दबाव की दोहरी रणनीति अपनाई है। एक ओर कतर के मध्यस्थों के जरिए दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुला हुआ है, तो दूसरी ओर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सीधे अमेरिकी नागरिकों को संबोधित किया है। IRGC ने नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले 25 पन्नों का एक खुला पत्र जारी कर अमेरिकी मतदाताओं से अपने वोट और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने की अपील की है। पत्र में कहा गया है कि यदि अमेरिका अपनी पश्चिम एशिया नीति में बदलाव करता है तो ईरान और अमेरिका शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। IRGC की यह अपील अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से करीब पांच सप्ताह पहले सामने आई है। इन चुनावों में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों के लिए मतदान होता है।
IRGC ने अमेरिकी जनता से क्या कहा?
IRGC के खुले पत्र में अमेरिकी नागरिकों से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और इजराइल को दिए जा रहे अमेरिकी समर्थन पर पुनर्विचार करने की अपील की गई है। पत्र में अमेरिकी मतदाताओं से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने को कहा गया है। ईरान की ओर से यह संदेश ऐसे समय में दिया गया है जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच युद्ध समाप्त करने तथा परमाणु मुद्दे पर बातचीत की संभावनाओं को लेकर प्रयास चल रहे हैं।
युद्ध के लक्ष्य पूरे नहीं होने का दावा
IRGC ने अपने पत्र में दावा किया है कि अमेरिका और इजराइल युद्ध के दौरान अपने प्रमुख उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सके। ईरानी संगठन के मुताबिक, सत्ता परिवर्तन कराने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और उसकी मिसाइल क्षमता को समाप्त करने जैसे घोषित लक्ष्य पूरे नहीं हुए हैं। हालांकि, ये दावे ईरानी पक्ष के हैं और अमेरिका तथा इजराइल की ओर से युद्ध के उद्देश्यों और उसके परिणामों की अलग-अलग व्याख्या की गई है।
'डेथ टू अमेरिका' नारे पर सफाई
IRGC के पत्र में लंबे समय से ईरान में इस्तेमाल होने वाले 'डेथ टू अमेरिका' नारे को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि यह नारा अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस की नीतियों के विरोध में है। IRGC ने अमेरिकी नागरिकों और अमेरिकी प्रशासन के बीच अंतर करते हुए कहा कि ईरान की आपत्ति अमेरिकी लोगों से नहीं, बल्कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य और विदेश नीति से है।
अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप कम करने की अपील
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिकी मतदाताओं से पश्चिम एशिया में सैन्य हस्तक्षेप कम करने और इजराइल को दिए जा रहे समर्थन का विरोध करने की अपील की है। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि इस पत्र से अमेरिकी प्रशासन की नीति तुरंत बदल जाएगी। उनके मुताबिक, पत्र का उद्देश्य अमेरिकी मतदाताओं तक ईरान का पक्ष पहुंचाना और उन्हें ईरान-अमेरिका विवाद के बारे में अधिक जानकारी देना है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की ईरान की परमाणु नीति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाए।
कतर की मध्यस्थता से बातचीत जारी
IRGC की अपील ऐसे समय आई है जब न्यूयॉर्क में कतर के मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है। दोनों देशों के बीच प्रमुख विवाद परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान से ठोस रियायतों की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी हटाने और अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत पर जोर दे रहा है।
ट्रंप ने प्रतिबंधों में राहत की खबरों को नकारा
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस कदम उठाने के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत और उसकी फ्रीज संपत्तियों तक पहुंच देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि उन्होंने ईरान को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने एक्सियोस और सीएनएन से कहा था कि परमाणु मुद्दे पर ठोस प्रगति होने की स्थिति में प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज संपत्तियों को जारी करने पर विचार किया जा सकता है।
होर्मुज संकट का तेल बाजार पर असर
ईरान-अमेरिका तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन करीब एक करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात हुआ। यह युद्ध से पहले के स्तर का लगभग आधा बताया गया है। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। होर्मुज दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में से एक है, इसलिए यहां किसी भी तरह के व्यवधान का असर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव
युद्ध और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल कमजोर होकर एक डॉलर के मुकाबले करीब 25 लाख रियाल तक पहुंच गई है। दो सितंबर को यह दर करीब 22 लाख रियाल थी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि प्रतिबंधों से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसके जवाब में ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने चेतावनी दी कि यदि ईरान का तेल निर्यात रोका गया तो खाड़ी क्षेत्र में दूसरे देशों का बुनियादी ढांचा भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
इराक के साथ हवाई संपर्क बहाल होने की तैयारी
इस बीच अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बाद इराक एयरवेज ने ईरान से नजफ आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए उड़ानें दोबारा शुरू करने की तैयारी की है। इससे संकेत मिलता है कि तनाव के बीच कुछ क्षेत्रों में संपर्क और आवाजाही सामान्य करने के प्रयास भी जारी हैं। ईरान का अमेरिकी मतदाताओं को सीधे संबोधित करना इस संघर्ष के कूटनीतिक और राजनीतिक आयाम को और व्यापक बनाता है। नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले जारी IRGC का पत्र ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव के साथ-साथ परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और होर्मुज को लेकर बातचीत भी चल रही है।