इस्लामाबाद। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान के सबसे बड़े और अहम इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन (ऑपरेशन) से जुड़ी संभावित डील को खत्म कर दिया है। पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE ने एयरपोर्ट को लीज पर लेने या उसके प्रबंधन में शामिल होने की योजना से खुद को अलग कर लिया है। इस फैसले को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत की अचानक हुई यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसने क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन रिपोर्ट्स पर पलटवार करते हुए कहा है कि UAE के साथ इस्लामाबाद एयरपोर्ट के संचालन को लेकर कभी कोई अंतिम या औपचारिक समझौता हुआ ही नहीं था। सरकार ने ऐसी खबरों को “भ्रामक और तथ्यहीन” बताया है।
पाकिस्तान की सफाई: ‘कोई डील थी ही नहीं’
पाकिस्तान सरकार ने बयान जारी कर कहा कि UAE के साथ एयरपोर्ट को लीज पर देने या चलाने को लेकर कोई पक्की डील नहीं हुई थी। सरकार के मुताबिक, मीडिया में यह दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने UAE के साथ प्रस्तावित समझौता रद्द कर दिया, जबकि हकीकत यह है कि बातचीत प्रारंभिक स्तर से आगे बढ़ ही नहीं पाई थी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह महज एक विचार और शुरुआती चर्चा तक सीमित था, जिसे औपचारिक समझौते का रूप कभी नहीं दिया गया।
छह महीने पहले शुरू हुई थी बातचीत
UAE और पाकिस्तान के बीच अगस्त 2025 में इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन को UAE के हवाले करने को लेकर प्रारंभिक बातचीत शुरू हुई थी। उस समय यह माना जा रहा था कि UAE की कोई सरकारी या निजी कंपनी एयरपोर्ट का प्रबंधन संभाल सकती है। यह कदम पाकिस्तान की गंभीर आर्थिक चुनौतियों के बीच विदेशी निवेश आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा था। पाकिस्तान का एविएशन सेक्टर लंबे समय से घाटे में चल रहा है और सरकार उसे सुधारने के लिए बाहरी विशेषज्ञता और निवेश की तलाश में थी। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तब उम्मीद जताई थी कि UAE की एयरलाइंस और ऑपरेशनल एक्सपर्टीज से इस्लामाबाद एयरपोर्ट की सेवाओं, प्रबंधन और राजस्व में सुधार हो सकता है।
भारत दौरे से जुड़ा UAE-PAK डील टूटने का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि UAE द्वारा इस डील से पीछे हटने की एक बड़ी वजह राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा है। नाहयान 19 जनवरी को अचानक भारत पहुंचे थे। उनकी यात्रा की घोषणा सिर्फ एक दिन पहले, 18 जनवरी को की गई थी। यह दौरा भले ही सिर्फ दो घंटे का रहा, लेकिन इसे कूटनीतिक रूप से बेहद अहम माना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए खुद दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर नाहयान का स्वागत किया। इस दौरान भारत और UAE के बीच ट्रेड, डिफेंस और रणनीतिक सहयोग से जुड़े 9 बड़े समझौतों पर सहमति बनी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इसे “छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण दौरा” बताया।
UAE के प्रतिनिधिमंडल में अबू धाबी और दुबई के शाही परिवारों के सदस्य, वरिष्ठ मंत्री और शीर्ष अधिकारी शामिल थे। इस यात्रा के बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि UAE अब पाकिस्तान की बजाय भारत के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को प्राथमिकता दे रहा है।
लोकल पार्टनर बना बड़ी बाधा
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, UAE के पीछे हटने की वजह सिर्फ कूटनीतिक नहीं थी। बताया जा रहा है कि UAE को इस्लामाबाद एयरपोर्ट के लिए पाकिस्तान में कोई मजबूत और भरोसेमंद लोकल पार्टनर ढूंढ़ने में देरी हो रही थी। बिना स्थानीय साझेदार के इतने बड़े और संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में उतरना UAE के लिए जोखिम भरा माना जा रहा था।
पाकिस्तान-UAE रिश्तों में क्यों बढ़ा तनाव?
पाकिस्तान और UAE के रिश्ते दशकों से मजबूत माने जाते रहे हैं, लेकिन बीते कुछ महीनों में इनमें दरार साफ दिखाई देने लगी है। इसकी एक बड़ी वजह पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सितंबर 2025 में हुआ रक्षा समझौता बताया जा रहा है। इस समझौते के तहत, दोनों देशों ने यह तय किया कि किसी एक पर हुआ हमला, दोनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। यह प्रावधान UAE के लिए चिंता का विषय बन गया, क्योंकि सऊदी अरब और UAE के रिश्ते खुद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।
यमन युद्ध और खाड़ी की राजनीति का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब और UAE के बीच बढ़ते मतभेदों का असर अब पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर भी दिखने लगा है। यमन गृहयुद्ध में दोनों देशों ने अलग-अलग गुटों का समर्थन किया है। हाल ही में सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में UAE समर्थित अलगाववादी संगठन STC के ठिकानों पर हमले किए थे। इसके बाद UAE को यमन से अपनी सेना हटाने पर मजबूर होना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों के आपसी संबंधों को और जटिल बना दिया, जिसका सीधा असर पाकिस्तान-UAE संबंधों पर पड़ा है।
नई धुरी: भारत-UAE बनाम पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की
मौजूदा हालात में UAE भारत के साथ डिफेंस और आर्थिक सहयोग को तेजी से बढ़ा रहा है, जबकि पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्की के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है। जनवरी 2026 में तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक और रक्षा समझौते की चर्चा चल रही है, जिसे UAE अपने रणनीतिक हितों के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है।
नए विदेशी साझेदार की तलाश
UAE द्वारा इस्लामाबाद एयरपोर्ट ऑपरेशन से दूरी बनाने की खबरें भले ही पाकिस्तान की आधिकारिक सफाई के बाद भी विवादों में घिरी हों, लेकिन यह साफ है कि बदलती क्षेत्रीय राजनीति, भारत-UAE की बढ़ती नजदीकी और खाड़ी देशों के आपसी तनाव ने इस पूरे मसले को सिर्फ एक व्यावसायिक डील से कहीं ज्यादा बड़ा बना दिया है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान इस झटके से कैसे निपटता है और क्या वह अपने एविएशन सेक्टर के लिए कोई नया विदेशी साझेदार तलाश पाता है।