अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए 'फर्जी लूट' का खेल, FBI ने 11 भारतीयों को किया गिरफ्तार
अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 11 भारतीयों पर वीजा धोखाधड़ी का आरोप लगा है। इन लोगों ने ग्रीन कार्ड पाने के लिए 'U-Visa' हासिल करने हेतु स्टोर्स में फर्जी डकैतियां करवाई थीं, ताकि वे खुद को अपराध का शिकार बता सकें।
वाशिंगटन। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 11 भारतीय नागरिकों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप लगा है। अमेरिकी सरकारी वकीलों के अनुसार, इन लोगों ने ग्रीन कार्ड हासिल करने के एक शॉर्टकट के तौर पर सुविधा दुकानों में हथियारों के बल पर डकैती का नाटक रचा था।
क्या था पूरा मामला और साजिश?
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने जानबूझकर दुकानों में फर्जी डकैती की योजना बनाई। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि स्टोर में काम करने वाले क्लर्क आव्रजन आवेदनों में खुद को अपराध का शिकार बता सकें। दरअसल, यह पूरी साजिश 'U Visa' प्राप्त करने के लिए रची गई थी। U Visa उन प्रवासियों को दिया जाता है जो किसी अपराध के शिकार हुए हों, जिन्होंने मानसिक या शारीरिक शोषण झेला हो और जो पुलिस की जांच में मददगार साबित हुए हों। यह वीजा प्रवासियों को काम करने की अनुमति देता है और 5 से 10 साल के भीतर ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
🚨#BREAKING: #FBI Boston's Violent Crimes Task Force has arrested 10 Indian nationals across MA, KY, MO, & OH for allegedly participating in staged armed robberies for the purpose of allowing store clerks to claim they were "victims" of violent crime so they could apply for… pic.twitter.com/SG4oQW9z1t
— FBI Boston (@FBIBoston) March 13, 2026
आरोपियों के नाम और उनकी स्थिति
इस मामले में जिन 11 लोगों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश का आरोप लगा है, उनके नाम हैं-जितेंद्रकुमार पटेल (39), महेशकुमार पटेल (36), संजयकुमार पटेल (45), दीपिकाबेन पटेल (40), रमेशभाई पटेल (52), अमिताबेन पटेल (43), रौनककुमार पटेल (28), संगीताबेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42), सोनल पटेल (42) और मितुल पटेल (40)।ये सभी मैसाचुसेट्स, केंटकी और ओहियो जैसे अमेरिकी राज्यों में अवैध रूप से रह रहे थे। दीपिकाबेन पटेल को मैसाचुसेट्स के वेमाउथ में अवैध रूप से रहने के कारण वापस भारत डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिया गया है।
जितेंद्रकुमार, महेशकुमार, संजयकुमार, अमिताबेन, संगीताबेन और मितुल को मैसाचुसेट्स में गिरफ्तार किया गया था और शुक्रवार को बोस्टन की संघीय अदालत में पेशी के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। रमेशभाई, रौनककुमार, सोनल और मिंकेश को केंटकी, मिसौरी और ओहियो में गिरफ्तार किया गया है। उन्हें बाद में बोस्टन की संघीय अदालत में पेश किया जाएगा।
कैसे दिया गया वारदात को अंजाम?
आरोप पत्र के अनुसार, मार्च 2023 में 'रामभाई' नामक मुख्य साजिशकर्ता और उसके साथियों ने मैसाचुसेट्स और अन्य स्थानों पर कम से कम छह सुविधा/शराब की दुकानों और फास्ट फूड रेस्तरां में फर्जी डकैतियों को अंजाम दिया। इस नाटक में, लुटेरा सीसीटीवी कैमरे के सामने बंदूक (या उस जैसा कोई हथियार) दिखाकर कैशियर या मालिक को धमकाता था और गल्ले से पैसे लेकर भाग जाता था।लुटेरे के भागने के पांच मिनट या उससे अधिक समय बाद, 'पीड़ित' क्लर्क या मालिक जानबूझकर पुलिस को फोन करके 'अपराध' की रिपोर्ट दर्ज कराते थे ताकि मामला असली लगे।
पैसों का लेन-देन और सजा का प्रावधान
जांच में सामने आया है कि इन कथित पीड़ितों (क्लर्कों) ने इस पूरी योजना में शामिल होने के लिए आयोजक रामभाई को पैसे दिए थे। इसके बदले में, रामभाई ने इस फर्जी डकैती के लिए अपनी दुकानों का इस्तेमाल करने देने के लिए स्टोर मालिकों को पैसे चुकाए थे। रामभाई, डकैती का नाटक करने वाले लुटेरे और उन्हें भगाने वाले ड्राइवर को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। वीजा धोखाधड़ी की साजिश के इस आरोप में अधिकतम 5 साल की जेल, 3 साल की निगरानी और 2,50,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 2 करोड़ रुपये) के जुर्माने का प्रावधान है।