ईरान को ट्रंप की कड़ी चेतावनी, कहा- देखते रहिए आज इन पागलों के साथ क्या होता है; युद्ध के बीच तेल बाजारों में बढ़ी हलचल

ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट करते हुए ईरान के खिलाफ तीखी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया देखेगी कि ईरान के साथ क्या होने वाला है।

Update: 2026-03-13 10:21 GMT
वॉशिंंगटन। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट करते हुए ईरान के खिलाफ तीखी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया देखेगी कि ईरान के साथ क्या होने वाला है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है और पूरे पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान

अपने पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि हालिया हमलों में ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने लिखा कि ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसकी वायुसेना भी प्रभावी रूप से काम करने की स्थिति में नहीं बची है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के कई सैन्य संसाधनों को नष्ट किया जा रहा है, जिनमें मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और अन्य रक्षा उपकरण शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संदेश में यह भी दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान ईरान के कई शीर्ष नेता भी मारे गए हैं।

‘ईरान कभी भी सरेंडर कर सकता है’

G7 बैठक के दौरान भी ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए ईरान किसी भी समय सरेंडर कर सकता है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य दबाव और हालिया हमलों के कारण ईरान की स्थिति कमजोर हो गई है।

47 साल पुराने आरोपों का जिक्र

ट्रंप ने अपने पोस्ट में ईरान पर पिछले कई दशकों से दुनिया भर में हिंसा फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने लिखा कि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में निर्दोष लोगों की हत्या की है। उन्होंने अपने बयान में कहा, उन्होंने 47 साल तक दुनिया भर में निर्दोष लोगों को मारा है और अब मैं, अमेरिका का 47वां राष्ट्रपति, उन्हें खत्म कर रहा हूं। यह मेरे लिए बड़ा सम्मान है। ट्रंप का यह बयान काफी आक्रामक माना जा रहा है और इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

मोजतबा की चेतावनी के बाद बढ़ा तनाव

ट्रंप की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब ईरान के नए सर्वोच्च नेता आयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मोजतबा खामेनेई ने हाल ही में एक बयान जारी कर कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रह सकते हैं। यह बयान पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच मोजतबा खामेनेई का पहला सार्वजनिक संदेश माना जा रहा है।

तेल बाजारों में मची हलचल

ईरान की इस चेतावनी के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

रूसी तेल खरीद पर दी अस्थायी छूट

इसी बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण फैसला भी लिया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने नोटिस जारी कर बताया कि कुछ शर्तों के तहत देशों को रूसी कच्चे तेल से जुड़े लेनदेन की अस्थायी अनुमति दी जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, 12 मार्च को सुबह 12:01 बजे या उससे पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े लेनदेन की अनुमति दी गई है। यह छूट 11 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

बढ़ते संघर्ष से वैश्विक चिंता

पिछले लगभग दो हफ्तों से अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर लगातार सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं। इसके जवाब में ईरान भी इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। इस बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। साथ ही वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता बढ़ गई है, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाता है और क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम करने में सफल हो पाएंगे।
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