अटलांटिक महासागर का नाम ‘अमेरिकी महासागर’ रखने पर सुंदर पिचाई ने ट्रंप को क्यों किया मना?

ट्रंप के अनुसार, उन्होंने पिचाई से पूछा था कि क्या गूगल मैप्स पर अटलांटिक महासागर का नाम बदलकर ‘अमेरिकी महासागर’ किया जा सकता है। इस पर पिचाई ने उन्हें बताया कि महासागर कई देशों तक फैले होते हैं और उनसे अनेक देशों के हित जुड़े होते हैं।;

Update: 2026-10-23 08:37 GMT

वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों और भौगोलिक नामों को लेकर दिए जाने वाले सुझावों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। अब उन्होंने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया है। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने पिचाई से अटलांटिक महासागर का नाम बदलकर ‘अमेरिकी महासागर’ करने की संभावना पर सवाल किया था। हालांकि, पिचाई ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया और उन्हें समझाया कि महासागर कई देशों से जुड़े होते हैं, इसलिए उनका नाम बदलने का मामला किसी एक देश के भीतर मौजूद स्थानों से अलग है। ट्रंप ने यह घटना दक्षिण कैरोलाइना के क्लेम्सन में मध्यावधि चुनाव से जुड़ी रैली के दौरान सुनाई। उनके बयान से एक बार फिर यह सवाल चर्चा में आ गया है कि भौगोलिक स्थानों के नाम तय करने और डिजिटल मैप पर उन्हें प्रदर्शित करने में राष्ट्रीय राजनीति की कितनी भूमिका हो सकती है।

सुंदर पिचाई ने ट्रंप को क्या समझाया?

ट्रंप के अनुसार, उन्होंने पिचाई से पूछा था कि क्या गूगल मैप्स पर अटलांटिक महासागर का नाम बदलकर ‘अमेरिकी महासागर’ किया जा सकता है। इस पर पिचाई ने उन्हें बताया कि महासागर कई देशों तक फैले होते हैं और उनसे अनेक देशों के हित जुड़े होते हैं। इसलिए ऐसे जलक्षेत्र का नाम बदलना किसी स्थानीय भौगोलिक स्थान का नाम बदलने जैसा सरल मामला नहीं है। ट्रंप ने रैली में बताया कि पिचाई की बात सुनने के बाद उन्होंने अटलांटिक महासागर का नाम बदलने का विचार छोड़ने की बात कही। हालांकि, उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में इस विषय पर मजाकिया टिप्पणी भी की। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रशांत महासागर का नाम ‘अमेरिकी महासागर’ रख दिया जाए, तो यूरोप के देशों की प्रतिक्रिया कैसी होगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘ट्रंप स्ट्रेट’ कहकर किया संबोधित

रैली के दौरान ट्रंप ने केवल अटलांटिक महासागर के नाम का मुद्दा नहीं उठाया। ईरान के साथ जारी तनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘ट्रंप स्ट्रेट’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने इस संदर्भ में सवाल किया कि अरब देश इस नाम को लेकर क्या सोचेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों का परिवहन इसी रास्ते से होता है। इसलिए इस क्षेत्र में तनाव या समुद्री आवाजाही में किसी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। ट्रंप की टिप्पणी को उनके राजनीतिक और व्यंग्यात्मक अंदाज के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, उनके इस बयान का अर्थ यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का आधिकारिक नाम बदल दिया गया है।

मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलने का फैसला भी आया चर्चा में

ट्रंप ने अपने तर्क के समर्थन में मेक्सिको की खाड़ी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने सवाल किया कि जब इस जलक्षेत्र का नाम बदला जा सकता है, तो दूसरे भौगोलिक स्थानों के नाम बदलने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए। गौरतलब है कि जनवरी 2025 में ट्रंप ने मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘अमेरिका की खाड़ी’ करने का आदेश दिया था। इसके बाद गूगल मैप्स ने अमेरिकी यूजर्स के लिए इस जलक्षेत्र का नया नाम प्रदर्शित करना शुरू किया। इस बदलाव ने डिजिटल मानचित्रों पर भौगोलिक नामों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा भी पैदा की थी। हालांकि, किसी स्थान के नाम को लेकर किसी देश का फैसला और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस नाम की स्वीकार्यता अलग-अलग विषय हैं। खासकर साझा समुद्री क्षेत्रों के नामों को लेकर अलग-अलग देशों की नीतियां और परंपराएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

ईरान, परमाणु क्षमता और तेल की कीमतों पर भी बोले ट्रंप

रैली में ट्रंप ने ईरान के साथ तनाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने ईरान की परमाणु क्षमता को नष्ट करने और तेल की कीमतें जल्द नीचे आने का दावा किया। ये ट्रंप के राजनीतिक भाषण के दौरान किए गए दावे थे; इनके वास्तविक परिणामों का आकलन संबंधित घटनाक्रम और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। ट्रंप और सुंदर पिचाई से जुड़ा यह किस्सा भौगोलिक नामों, डिजिटल मैपिंग और राजनीति के आपसी संबंधों को सामने लाता है। अटलांटिक महासागर का नाम बदलने का सुझाव भले ही आगे नहीं बढ़ा, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित नाम भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

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