शेख हसीना की दोटूक- गिरफ्तारी, यातना या मौत का डर नहीं, बांग्लादेश लौटकर रहूंगी

यह पहली बार नहीं है, जब शेख हसीना ने सार्वजनिक रूप से बांग्लादेश लौटने की बात कही है। इससे पहले अगस्त में पत्रकारों के साथ वर्चुअल बातचीत के दौरान भी उन्होंने स्वदेश वापसी की इच्छा जताई थी। उस समय उन्होंने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना का जिक्र किया था।;

Update: 2026-10-21 05:24 GMT

वॉशिंगटन: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बार फिर अपने वतन लौटने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने कहा है कि गिरफ्तारी, यातना या हत्या का खतरा भी उन्हें स्वदेश वापसी से नहीं रोक सकता। भारत में रह रहीं हसीना का कहना है कि उनके समर्थक और बांग्लादेश के आम नागरिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में वह लंबे समय तक अपने देश से दूर नहीं रह सकतीं। उनकी इस टिप्पणी से बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने की संभावना है। हसीना ने वाशिंगटन में आयोजित एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी वापसी की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वह जोखिमों की परवाह किए बिना बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियां उनके इरादे को कमजोर नहीं कर सकतीं। हालांकि, उनकी स्वदेश वापसी कब होगी और वहां पहुंचने पर उनकी राजनीतिक तथा कानूनी स्थिति क्या होगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल हुई थीं हसीना

बांग्लादेश में वर्ष 2024 के दौरान छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन व्यापक विरोध प्रदर्शनों में बदल गया था। हिंसक घटनाओं और राजनीतिक संकट के बीच पांच अगस्त 2024 को शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद हसीना को देश छोड़ना पड़ा और तब से वह भारत में रह रही हैं। सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक परिस्थितियों में बड़े बदलाव आए। हसीना की वापसी का मुद्दा उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री ने अब एक बार फिर संकेत दिया है कि वह अपने राजनीतिक भविष्य को देश से बाहर रहकर तय नहीं करना चाहतीं।

भारत सरकार और लोगों के प्रति जताया आभार

वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हसीना ने भारत सरकार और भारतीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में भारत ने उन्हें आश्रय दिया और यहां के लोगों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों ने उन्हें स्वीकार किया। हसीना ने कहा, “भारत सरकार, लोगों और सभी दलों का धन्यवाद। उन्होंने मुझे उसी तरह अपनाया, जिस तरह 1975 में अपनाया था।” इस बयान में उन्होंने अपने परिवार के उस कठिन दौर का भी उल्लेख किया, जब 1975 में उनके परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। उस घटना में शेख हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना बच गई थीं। इसके बाद दोनों लंबे समय तक देश से बाहर रहीं। हसीना की ताजा टिप्पणी में भारत के प्रति कृतज्ञता के साथ अपने देश लौटने की उनकी इच्छा भी स्पष्ट दिखाई दी।

पहले भी कर चुकी हैं वापसी का ऐलान

यह पहली बार नहीं है, जब शेख हसीना ने सार्वजनिक रूप से बांग्लादेश लौटने की बात कही है। इससे पहले अगस्त में पत्रकारों के साथ वर्चुअल बातचीत के दौरान भी उन्होंने स्वदेश वापसी की इच्छा जताई थी। उस समय उन्होंने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना का जिक्र किया था। हालिया बयान में भी उन्होंने दोहराया कि वापसी से जुड़े संभावित खतरे उनके फैसले को प्रभावित नहीं करेंगे। हालांकि, उनकी वापसी की किसी निश्चित तारीख या यात्रा कार्यक्रम की पुष्टि नहीं हुई है। बांग्लादेश में उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रियाओं और राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी घोषणा आगे किस दिशा में बढ़ती है।

बेटे साजीब वाजेद का अमेरिका पर गंभीर आरोप

इस बीच, शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जाय ने वर्ष 2024 के आंदोलन को लेकर अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने उन गतिविधियों का समर्थन किया था, जिनके परिणामस्वरूप हसीना सरकार को सत्ता से हटना पड़ा। वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से पुष्ट प्रमाणों का विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए इन्हें साजीब वाजेद के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना की वापसी, अवामी लीग का भविष्य और वर्ष 2024 के आंदोलन को लेकर विवाद अब भी महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। हसीना के ताजा बयान ने इन बहसों को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में उनकी वापसी की संभावनाओं और बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा पर सबकी नजर रहेगी।

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