'भारत से विवाद सुलझाने की जरूरत', पूर्व पाकिस्तानी जनरल ने दी बड़े टकराव की चेतावनी

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक स्ट्रैटेजिक विजन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में बोलते हुए हयात ने कश्मीर मुद्दे के समाधान और सिंधु जल संधि की बहाली को क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण बताया। संस्थान की ओर से जारी बयान में उनके विचारों की जानकारी दी गई।;

Update: 2026-10-22 06:43 GMT

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को लेकर पाकिस्तान के एक वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ ने अहम टिप्पणी की है। पाकिस्तान की ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जनरल (सेवानिवृत्त) जुबैर महमूद हयात ने दोनों देशों के बीच विवादों के स्थायी समाधान और राजनीतिक बातचीत पर जोर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि मूल समस्याओं का समाधान किए बिना किसी संकट को समाप्त करना भविष्य में और गंभीर टकराव की वजह बन सकता है। हयात के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान जैसे दो परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी देशों के बीच शांति बनाए रखने के लिए केवल परमाणु प्रतिरोध पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।

कश्मीर और सिंधु जल संधि को लेकर क्या बोले हयात?

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक स्ट्रैटेजिक विजन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में बोलते हुए हयात ने कश्मीर मुद्दे के समाधान और सिंधु जल संधि की बहाली को क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण बताया। संस्थान की ओर से जारी बयान में उनके विचारों की जानकारी दी गई। हयात ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों का समाधान किए बिना तनाव को कुछ समय के लिए कम करना स्थायी शांति की गारंटी नहीं देता। उनके अनुसार, जब तक दोनों देशों के बीच मौजूद बुनियादी मतभेदों पर गंभीरता से बातचीत नहीं होती, तब तक किसी नए संकट के उभरने की आशंका बनी रहेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में स्थिरता कायम करने के लिए राजनीतिक स्तर पर लगातार संवाद और विवादों को सुलझाने की प्रभावी व्यवस्था आवश्यक है। हालांकि, कश्मीर और सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के रुख में लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

मई 2025 के सैन्य संघर्ष से क्या सबक मिला?

पूर्व पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना से भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं। उनके अनुसार, परमाणु हथियारों की मौजूदगी दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकती। हयात ने चेताया कि परमाणु प्रतिरोध को संघर्ष रोकने का एकमात्र साधन मानना खतरनाक हो सकता है। उनका कहना था कि दोनों देशों के पास परमाणु क्षमता होने के बावजूद तनाव बढ़ सकता है और हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच सकते हैं, जहां फैसले लेने के लिए बहुत कम समय बचे। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए किसी भी सैन्य टकराव को सामान्य घटना की तरह नहीं लिया जाना चाहिए। युद्ध की स्थिति में गलत आकलन या किसी अप्रत्याशित घटनाक्रम के कारण हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।

नई तकनीक और गलत फैसलों से बढ़ सकता है खतरा

हयात ने भविष्य में भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित संकटों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टकराव की परिस्थितियां पहले से काफी अलग हो सकती हैं। नई सैन्य तकनीक, बदलता राजनीतिक नेतृत्व और तेजी से निर्णय लेने की जरूरत तनाव को और बढ़ा सकती है। उनके मुताबिक, जब सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के पास परिस्थितियों का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता, तब गलत फैसले लेने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में कोई छोटी घटना भी बड़े संकट का रूप ले सकती है। उन्होंने आगाह किया कि परमाणु हथियारों से लैस देशों के बीच युद्ध के लिए किसी भी परिस्थिति को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इसलिए संकट के समय संवाद के रास्ते खुले रखना और तनाव कम करने के लिए प्रभावी तंत्र तैयार करना बेहद जरूरी है।

दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए बातचीत जरूरी

पूर्व पाकिस्तानी जनरल ने दक्षिण एशिया में अस्थिरता की प्रमुख वजहों में प्रभावी संकट प्रबंधन व्यवस्था की कमी और निरंतर राजनीतिक बातचीत का अभाव बताया। उनके अनुसार, क्षेत्र में एक ओर परमाणु प्रतिरोध बड़े युद्ध को रोकने में भूमिका निभाता है, तो दूसरी ओर अनसुलझे विवाद बार-बार तनाव पैदा करते रहते हैं। हयात की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत और पाकिस्तान के संबंधों में विश्वास बहाली और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे लगातार अहम बने हुए हैं। उनके बयान का मुख्य संदेश यह है कि केवल सैन्य ताकत या परमाणु हथियारों के डर के भरोसे स्थायी शांति कायम नहीं की जा सकती।

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