'यह हमारी जंग नहीं है': ईरान युद्ध के बीच ब्रिटेन ने भी छोड़ा ट्रंप का साथ! होर्मुज पर बुलाई 35 देशों की बैठक

स्टार्मर का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका सहित कई सहयोगी देश ब्रिटेन पर सैन्य समर्थन देने का दबाव बना रहे थे। बावजूद इसके, ब्रिटेन ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।

Update: 2026-04-01 11:34 GMT

लंदन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने एक अहम और स्पष्ट रुख अपनाया है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं, लेकिन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कर दिया है कि उनका देश इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं होगा। उन्होंने दो टूक कहा—“यह हमारी लड़ाई नहीं है।” स्टार्मर का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका सहित कई सहयोगी देश ब्रिटेन पर सैन्य समर्थन देने का दबाव बना रहे थे। बावजूद इसके, ब्रिटेन ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।

दबाव के बीच लिया सख्त रुख

नाटो सहयोगी देशों की ओर से ब्रिटेन पर इस संघर्ष में शामिल होने का दबाव बढ़ रहा था। माना जा रहा था कि अमेरिका, अपने पारंपरिक सहयोगी ब्रिटेन से सैन्य समर्थन की उम्मीद कर रहा था।

हालांकि, प्रधानमंत्री स्टार्मर ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी ऐसे आक्रामक अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगे, जिससे ब्रिटेन की सुरक्षा और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचे। उनका यह रुख ब्रिटेन की स्वतंत्र विदेश नीति और संतुलित रणनीति को दर्शाता है।

35 देशों की ‘महाबैठक’ की तैयारी

सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाने के साथ-साथ ब्रिटेन ने कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने घोषणा की है कि ब्रिटेन इस सप्ताह लगभग 35 देशों की एक अहम बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और चालू करना है, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस ‘महाबैठक’ की अध्यक्षता ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर करेंगी। हालांकि, बैठक की तारीख का अभी खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इसे वर्तमान संकट के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कूटनीति से समाधान पर जोर

प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि इस बैठक में सभी संभावित कूटनीतिक और राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा की जाएगी। उनका लक्ष्य है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जरूरी सामानों की आपूर्ति को फिर से शुरू किया जा सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बैठक के बाद सैन्य योजनाकारों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि युद्ध के बाद क्षेत्र को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाने की रणनीति तैयार की जा सके। इस पहल में वे देश भी शामिल होंगे, जिन्होंने हाल ही में एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर कर यह संकल्प लिया था कि वे होर्मुज के जरिए सुरक्षित समुद्री आवागमन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

सीमित सैन्य सहयोग: सख्त शर्तों के साथ

हालांकि ब्रिटेन ने युद्ध में सीधे शामिल होने से इनकार किया है, लेकिन उसने पूरी तरह हाथ भी नहीं खींचे हैं। ब्रिटेन ने अमेरिका को साइप्रस स्थित अपने ‘आरएएफ अक्रोतिरी’ सैन्य ठिकाने के सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी है। यह अनुमति सख्त शर्तों के साथ दी गई है। ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस ठिकाने का उपयोग केवल रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है, जैसे मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट करना। हाल ही में रॉयल एयर फोर्स (RAF) ने खाड़ी क्षेत्र में सहयोगियों की मदद करते हुए कुछ ईरानी ड्रोन को मार गिराया था, जो इस सीमित सैन्य सहयोग का उदाहरण है।

अमेरिका की नाराजगी खुलकर सामने आई

ब्रिटेन के इस रुख से अमेरिका खुश नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन द्वारा अपने सैन्य ठिकानों के “असीमित उपयोग” की अनुमति न देना दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों में दरार का संकेत हो सकता है। ट्रंप का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि पश्चिमी सहयोगियों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद उभर रहे हैं।

आर्थिक कारण भी अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन का यह फैसला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। अगर ब्रिटेन इस युद्ध में शामिल होता है, तो स्वेज नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में बाधा आ सकती है। इसका सीधा असर तेल आपूर्ति पर पड़ेगा, जिससे ब्रिटेन में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। प्रधानमंत्री स्टार्मर इस जोखिम को भली-भांति समझते हैं और इसी कारण उन्होंने सतर्क रुख अपनाया है।

संतुलन साधने की कोशिश

ब्रिटेन का यह रुख दिखाता है कि वह एक तरफ अपने पारंपरिक सहयोगी अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ अनावश्यक सैन्य संघर्ष से बचकर अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी करना चाहता है।

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