वॉशिंगटन/मॉस्को: US Iran War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी खुफिया तंत्र से जुड़े दो अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि रूस ने ईरान को ऐसी संवेदनशील जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे तेहरान को क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर हमला करने में मदद मिल सकती है। हालांकि अमेरिका के व्हाइट हाउस ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाने में मदद की आशंका
अमेरिकी खुफिया जानकारी से परिचित अधिकारियों के अनुसार, रूस द्वारा साझा की गई जानकारी से ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों, सैन्य विमानों और अन्य रक्षा संसाधनों की गतिविधियों के बारे में अहम संकेत मिल सकते हैं। हालांकि इन अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि रूस ईरान को इन सूचनाओं के उपयोग के लिए कोई निर्देश दे रहा है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की खुफिया जानकारी वास्तव में साझा की गई है, तो इससे पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की जटिलता और बढ़ सकती है।
व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट को बताया निराधार
इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि रूस द्वारा ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा करने की खबरें सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ईरान में चल रहे सैन्य अभियानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। लेविट ने कहा, ईरान के खिलाफ हमारे सैन्य अभियान जारी हैं और हम उनकी सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि इस बारे में राष्ट्रपति स्वयं ही जानकारी देंगे।
अमेरिका स्थिति पर रख रहा नजर
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका हर गतिविधि पर नजर रख रहा है और सभी संभावित स्थितियों को अपनी सैन्य रणनीति में शामिल कर रहा है। उन्होंने कहा, अमेरिकी जनता निश्चिंत रह सकती है कि उनके कमांडर इन चीफ को पूरी जानकारी है कि कौन किससे संपर्क में है। जो भी गतिविधि स्वीकार्य नहीं है, उसका कड़ा विरोध किया जाएगा। हेगसेथ ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार है।
क्रेमलिन ने टिप्पणी से किया परहेज
इस मुद्दे पर रूस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव से जब पूछा गया कि क्या रूस राजनीतिक समर्थन से आगे बढ़कर ईरान को सैन्य सहायता देगा, तो उन्होंने कहा कि तेहरान की ओर से अभी तक ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया है। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने ईरान को किसी प्रकार की सैन्य या खुफिया सहायता दी है, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पेस्कोव की इस प्रतिक्रिया को विश्लेषक सावधानीपूर्वक कूटनीतिक जवाब मान रहे हैं।
शाहेद ड्रोन से निपटने में यूक्रेन की विशेषज्ञता
इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक अलग बयान में कहा है कि अमेरिका और उसके पश्चिम एशियाई सहयोगी ईरान के शाहेद ड्रोन से निपटने के लिए यूक्रेन की विशेषज्ञता चाहते हैं। तेहरान रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस को शाहेद ड्रोन की आपूर्ति कर रहा है और हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमलों में भी इन ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है। जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत के साथ संभावित सहयोग के मुद्दे पर बातचीत की है।
यूक्रेन ने सहयोग का जताया भरोसा
अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ओल्गा स्टेफनिशिना ने कहा कि यूक्रेन को शाहेद ड्रोन हमलों से निपटने का लंबा अनुभव है। उन्होंने कहा, हमारे शहरों को लगभग हर रात इन ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमें इनसे बचाव के प्रभावी तरीके पता हैं। जब हमारे सहयोगियों को मदद की जरूरत होती है, तो यूक्रेन हमेशा सहयोग के लिए तैयार रहता है।”
वैश्विक समीकरणों पर पड़ सकता है असर
विश्लेषकों का मानना है कि रूस, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप वैश्विक शक्ति संतुलन को और जटिल बना सकते हैं। एक ओर पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन युद्ध से जुड़े समीकरण भी इस क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत सामने आते हैं या यह मामला केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहता है।