मॉस्को: Black Widow Scam: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस में एक कथित नए घोटाले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। रूसी मीडिया और स्थानीय अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ महिलाएं युद्ध पर जाने वाले सैनिकों से जल्दबाजी में विवाह कर रही हैं, ताकि उनकी मृत्यु के बाद मिलने वाले सरकारी मुआवजे पर कानूनी अधिकार हासिल किया जा सके। इन आरोपों के चलते ऐसी महिलाओं को रूसी मीडिया में 'ब्लैक विडो' कहा जा रहा है। हालांकि इन मामलों की जांच अलग-अलग स्तर पर जारी है और सभी आरोप अदालतों में सिद्ध नहीं हुए हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने रूस की सैन्य और सामाजिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल से लेकर सेना तक मिलीभगत के आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें सैनिकों ने मोर्चे पर रवाना होने से ठीक पहले या अस्पताल में इलाज के दौरान विवाह किया। इन घटनाओं के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं कुछ लोग सरकारी मुआवजा हासिल करने के लिए इस व्यवस्था का दुरुपयोग तो नहीं कर रहे। कुछ मामलों में सैन्य अस्पतालों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि विवाह की प्रक्रिया इतनी तेजी से पूरी हुई कि सैनिकों के परिवारों को इसकी जानकारी तक नहीं मिल सकी।
नर्स पर लगे कई सैनिकों से विवाह करने के आरोप
सबसे चर्चित मामले में एक सैन्य अस्पताल की नर्स जांच के दायरे में आई। आरोप है कि उसने अलग-अलग समय पर इलाज करा रहे पांच घायल सैनिकों से विवाह किया। जांच एजेंसियों के अनुसार, आशंका जताई गई कि इन विवाहों का उद्देश्य सैनिकों की मृत्यु के बाद मिलने वाले सरकारी मुआवजे पर दावा करना था। मामला सार्वजनिक होने के बाद संबंधित नर्स को उसकी नौकरी से हटा दिया गया। हालांकि जांच पूरी होने तक आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
बेटी को पिता की मौत के बाद पता चली शादी
सेंट पीटर्सबर्ग की रहने वाली मारिया का मामला भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें सेना की ओर से सूचना मिली कि उनके 59 वर्षीय पिता यूरी की यूक्रेन युद्ध में मृत्यु हो गई है। मारिया का कहना है कि उन्हें बाद में पता चला कि युद्ध क्षेत्र में भेजे जाने से केवल दो दिन पहले उनके पिता ने एक महिला से विवाह किया था। उनके अनुसार, वह महिला उनके पिता से लगभग 22 वर्ष छोटी थी और परिवार के किसी सदस्य ने उसका नाम पहले कभी नहीं सुना था। मारिया का आरोप है कि विवाह के बाद वह महिला कानूनी रूप से सबसे करीबी रिश्तेदार बन गई और सरकारी मुआवजे की प्रमुख दावेदार भी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पिता की संपत्ति का भी निपटारा कर दिया गया और परिवार को किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी गई।
सैनिकों के परिवार को मिलता है बड़ा आर्थिक पैकेज
रूस में युद्ध के दौरान मारे गए सैनिकों के परिजनों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक, मृत सैनिक के परिवार को कम से कम 50 लाख रूबल (करीब 62 लाख भारतीय रुपये) की एकमुश्त सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त बीमा और अन्य सरकारी लाभों को जोड़ने पर कुल राशि इससे भी अधिक हो सकती है। इसी आर्थिक सहायता को लेकर कथित धोखाधड़ी की आशंकाएं सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ लोग अकेले, बुजुर्ग या सामाजिक रूप से कमजोर सैनिकों को निशाना बनाकर विवाह करते हैं और बाद में कानूनी उत्तराधिकारी बनकर मुआवजे पर दावा करते हैं।
व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग तेज
इन मामलों के सामने आने के बाद रूस में सैनिकों के परिवारों और सामाजिक संगठनों ने मुआवजा वितरण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और सख्त जांच की मांग उठाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विवाह और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों की समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो वास्तविक आश्रितों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल संबंधित मामलों की जांच जारी है। रूसी प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।