नेपाल हिंसा में प्रधानमंत्री शाह ने विपक्षी नेताओं से मांगे सुझाव

काठमांडू, नेपाल के दक्षिणी मधेश प्रांत में फैली सांप्रदायिक हिंसा में तीन मौतों के बाद शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने क्षेत्र के राजनीतिक दलों के नेताओं और वहां के सांसदों से मुलाकात की।;

By :  IANS
Update: 2026-07-31 12:25 GMT

काठमांडू, नेपाल के दक्षिणी मधेश प्रांत में फैली सांप्रदायिक हिंसा में तीन मौतों के बाद शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने क्षेत्र के राजनीतिक दलों के नेताओं और वहां के सांसदों से मुलाकात की।

कहा जा रहा था क‍ि बालेंद्र शाह लंबे समय से विपक्षी दलों से बातचीत करने से बचते रहे हैं। उनका यह तरीका नेपाल की संसदीय लोकतांत्रिक परंपरा से अलग है क्योंकि आमतौर पर किसी बड़े राष्ट्रीय मुद्दे या संकट के समय प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से भी सलाह-मशविरा करते हैं। अब भारत की सीमा से लगे मधेश प्रांत में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा ने आखिरकार उन्हें अपनी लंबे समय की चुप्पी तोड़ने पर मजबूर कर दिया। हालांकि इस दौरान वे संसद को संबोधित करते रहे और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को नियमित रूप से जानकारी भी देते रहे।

प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, बालेंद्र शाह ने नेताओं को आमंत्रित कर उन तनावों पर चर्चा की जो पहले सुनसरी जिले में शुरू हुए थे और बाद में मधेश के कई अन्य जिलों तक फैल गए। बैठक में हालात को सामान्य करने और समुदायों के बीच फिर से भाईचारा कायम करने के उपायों पर भी बातचीत हुई।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने नेताओं से मधेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उनकी राय और सुझाव मांगे।

बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि उन्होंने तराई के कई जिलों में पैदा हुई समस्याओं के समाधान के लिए अपने सुझाव दिए। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील हैं और समस्या का समाधान निकालने के लिए गंभीरता से काम करना चाहते हैं।

बैठक में डॉ. सीके राउत, महंता ठाकुर, राजेंद्र महतो, लालबाबू राउत, शमीम मियां अंसारी, राम के शर्मा, प्रभु साह, अमरेश कुमार सिंह, शरत सिंह भंडारी, जयकांत राउत और अन्य नेता शामिल हुए। इनमें से अधिकांश ऐसे दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनकी प्रतिनिधि सभा में मौजूदगी नहीं है लेकिन संकट से प्रभावित क्षेत्र में उनका अच्छा जनसमर्थन है।

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नेताओं ने कहा कि इस तरह का संवाद संकट का समाधान निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जनमत पार्टी के अध्यक्ष डॉ. सीके राउत ने इसे बहुत सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार प्रधानमंत्री शाह ने मधेश केंद्रित राजनीतिक दलों के साथ सीधे चर्चा की है। साथ ही नेताओं ने दक्षिणी तराई के कुछ जिलों में चल रही समस्याओं के समाधान के लिए अपने सुझाव भी रखे।

इससे पहले दिन में बालेंद्र शाह ने मधेश क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों के साथ भी अलग बैठक की। इनमें से ज्यादातर सांसद उनकी अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) से थे। बैठक में क्षेत्र में हाल ही में हुई घटनाओं और उनके बाद बने हालात पर चर्चा हुई।

मधेश प्रांत में हालात को शांत करने में कथित निष्क्रियता को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच शाह ने क्षेत्र के नेताओं के साथ राजनीतिक बातचीत शुरू की। इस कदम के जरिए उन्होंने यह स्वीकार किया कि इस संकट के समाधान में ये नेता अहम हितधारक हैं।

मधेश प्रांत में हिंसा की शुरुआत 26 जुलाई को हुई जब सुनसरी जिले की देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका-3 के कप्तानगंज इलाके में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच झड़प हो गई।

सावन महीने में चलने वाले बोल बम उत्सव के दौरान हिंदू श्रद्धालु कोशी बैराज से पवित्र जल लेकर कप्तानगंज चौक की ओर जा रहे थे। इस दौरान वे तेज आवाज में डीजे भी बजा रहे थे।

पुलिस के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने तेज आवाज में बज रहे संगीत पर आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया, पहले धक्का-मुक्की हुई और फिर हालात हिंसक हो गए।

स्थिति को नियंत्रि‍त करने के दौरान ओम प्रकाश मेहता नामक एक युवक की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई।

इस घटना के बाद मधेश के अन्य इलाकों खासकर सिराहा जिले में भी विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं सामने आने लगीं। प्रशासन ने सिराहा और धनुषा जिले के जनकपुरधाम के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया। वहीं, भारत सीमा से लगे पर्सा जिले में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई।

शुक्रवार को भी इन सभी जिलों में कर्फ्यू जारी रहा। दूसरी ओर, देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील के साथ रैलियां भी निकाली गईं।

मधेश प्रांत से जुड़े दलों समेत विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की आलोचना की। उनका आरोप था कि उन्होंने समय रहते देश को संबोधित नहीं किया और हालात को सामान्य बनाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए।

प्रधानमंत्री की जगह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में न तो प्रधानमंत्री शामिल हुए और न ही गृह मंत्री। इसे लेकर विपक्षी दलों ने कड़ी नाराजगी जताई।

विपक्षी नेताओं ने संसद और प्रेस बयान दोनों के जरिए प्रधानमंत्री की आलोचना की। उनका कहना था कि संकट के समय प्रधानमंत्री देश के अभिभावक जैसी भूमिका निभाने में असफल रहे।

जैसे-जैसे दबाव बढ़ता गया और हिंसा दूसरे इलाकों तक फैलने लगी। बालेंद्र शाह ने गुरुवार को देश को संबोधित किया। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने की अपील की। उन्होंने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से भी मुलाकात कर मधेश प्रांत की स्थिति की जानकारी दी और उपराष्ट्रपति से फोन पर बात की।

इस बीच, आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने हिंदू और मुस्लिम धार्मिक नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में शांति बहाल करने के उपायों पर चर्चा हुई।

लामिछाने के साथ हुई बैठक के बाद विभिन्न धार्मिक संगठनों के नेताओं ने संयुक्त अपील जारी की। उन्होंने लोगों से शांत रहने और किसी भी तरह की भड़काऊ या नफरत फैलाने वाली गतिविधियों से दूर रहने की अपील की। साथ ही, कहा कि ऐसे किसी भी काम से बचना चाहिए जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता हो।

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