चीन की संसद से नौ वरिष्ठ सैन्य अधिकारी बाहर, शी जिनपिंग के कदम को मिली मंजूरी

2024 के दौरान भी शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाले शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) से कई शीर्ष अधिकारियों को बाहर किया गया था। यह आयोग चीन की सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है और सीधे राष्ट्रपति शी के नेतृत्व में काम करता है।

Update: 2026-02-27 06:56 GMT
बीजिंग: चीन की सर्वोच्च विधायी संस्था नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) की स्थायी समिति ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए नौ वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को प्रतिनिधियों की सूची से हटा दिया। इन अधिकारियों को पहले निलंबित किया गया था और अब औपचारिक रूप से उन्हें संसद की सदस्यता से बाहर कर दिया गया है। समिति ने साथ ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाली सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) द्वारा इन अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का समर्थन भी किया। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अगले महीने एनपीसी का वार्षिक सत्र शुरू होने वाला है।

एनपीसी सत्र से पहले अहम कार्रवाई

नेशनल पीपुल्स कांग्रेस का वार्षिक सत्र चार मार्च से शुरू होगा। इससे पहले स्थायी समिति ने सत्र के एजेंडे को अंतिम रूप दिया। इसी प्रक्रिया के दौरान सैन्य प्रतिनिधियों की सूची में बदलाव का निर्णय लिया गया। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस के प्रतिनिधियों की संख्या घटाकर अब 243 कर दी गई है। जिन नौ अधिकारियों को हटाया गया है, उनमें पांच जनरल, एक लेफ्टिनेंट जनरल और तीन मेजर जनरल शामिल हैं। हालांकि, आधिकारिक बयान में हटाए गए अधिकारियों के खिलाफ आरोपों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन यह कदम चीन में चल रहे अनुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

केंद्रीय सैन्य आयोग में भी बदलाव

2024 के दौरान भी शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाले शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) से कई शीर्ष अधिकारियों को बाहर किया गया था। यह आयोग चीन की सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है और सीधे राष्ट्रपति शी के नेतृत्व में काम करता है। पिछले महीने सर्वोच्च रैंकिंग वाले जनरल झांग यौक्सिया समेत दो शीर्ष सैन्य अधिकारियों के खिलाफ “गंभीर उल्लंघनों” और भ्रष्टाचार के आरोपों में जांच शुरू की गई थी। झांग यौक्सिया केंद्रीय सैन्य आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष रहे हैं और उन्हें लंबे समय से शी जिनपिंग के करीबी सहयोगियों में गिना जाता रहा है। हाल के वर्षों में पीएलए के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिससे संकेत मिलता है कि सैन्य ढांचे में व्यापक स्तर पर पुनर्गठन और निगरानी बढ़ाई जा रही है।

भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का विस्तार

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को प्राथमिकता दी है। इस अभियान के तहत पार्टी, सरकार और सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि सेना के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए यह अभियान तेज किया गया है। चीन की सेना का आधुनिकीकरण और वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका बढ़ाने की रणनीति के बीच नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि शीर्ष स्तर पर अनुशासन बना रहे। हालांकि आलोचकों का यह भी कहना है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का इस्तेमाल राजनीतिक नियंत्रण को मजबूत करने के साधन के रूप में भी किया जा सकता है। चीन की राजनीतिक व्यवस्था में पार्टी का वर्चस्व सर्वोपरि है और सेना सीधे पार्टी के नियंत्रण में काम करती है।

संसद और सेना का संबंध

नेशनल पीपुल्स कांग्रेस को चीन की सर्वोच्च विधायी संस्था माना जाता है। हालांकि वास्तविक नीतिगत निर्णय कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में लिए जाते हैं, लेकिन एनपीसी औपचारिक रूप से महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी देती है। पीएलए और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस के प्रतिनिधियों की संसद में मौजूदगी यह दर्शाती है कि सेना का राजनीतिक ढांचे में अहम स्थान है। ऐसे में प्रतिनिधियों की सूची से वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया जाना एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यह कदम न केवल सैन्य अनुशासन के संदर्भ में, बल्कि आगामी संसद सत्र के राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

एनपीसी सत्र का एजेंडा

चार मार्च से शुरू होने वाले एनपीसी सत्र में देश की आर्थिक, रक्षा और सामाजिक नीतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। चीन इस समय आर्थिक चुनौतियों, वैश्विक व्यापार तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों से जूझ रहा है। ऐसे में सैन्य नेतृत्व में बदलाव और अनुशासनात्मक कार्रवाइयां यह संकेत देती हैं कि शीर्ष नेतृत्व रक्षा क्षेत्र में सख्त रुख अपनाए हुए है। संसद सत्र में रक्षा बजट और सैन्य आधुनिकीकरण पर भी चर्चा संभावित है।

अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

चीन की सेना में हो रहे ये बदलाव अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण चीन सागर, ताइवान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच पीएलए की भूमिका अहम हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य ढांचे में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना चीन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इन कार्रवाइयों को आंतरिक अनुशासन का मामला बताया गया है, लेकिन वैश्विक समुदाय इन घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखे हुए है।

पुनर्गठन का हिस्सा

नौ वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को एनपीसी की सूची से हटाया जाना चीन की सैन्य और राजनीतिक संरचना में जारी पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है। केंद्रीय सैन्य आयोग में हालिया जांच और कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि सेना के शीर्ष स्तर पर भी जवाबदेही तय की जा रही है। आने वाले एनपीसी सत्र में यह देखना दिलचस्प होगा कि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर क्या घोषणाएं की जाती हैं और क्या सैन्य सुधारों को लेकर कोई नई दिशा सामने आती है। फिलहाल, संसद की स्थायी समिति के इस फैसले ने यह संकेत दे दिया है कि चीन का शीर्ष नेतृत्व सेना के भीतर अनुशासन और नियंत्रण को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है।

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