मोजतबा खामेनेई पर अटकलों के बीच ईरानी सरकार का खंडन, इस्राइल की धमकी के बाद तेज हुई चर्चाएं
इस घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान देते हुए कहा कि ईरान जिस भी व्यक्ति को अगला सुप्रीम लीडर चुनेगा, उसे “निशाने पर लिया जाएगा।”
तेहरान/तेल अवीव। ईरान के सर्वोच्च नेता के उत्तराधिकार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलों का दौर तेज हो गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुने जाने की खबरों के बीच इस्राइल की ओर से आई कड़ी चेतावनी ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, ईरानी सरकार और भारत स्थित उसके वाणिज्य दूतावास ने इन खबरों का आधिकारिक रूप से खंडन किया है। ईरान ने साफ कहा है कि विशेषज्ञ सभा (Assembly of Experts) द्वारा किसी भी नए सर्वोच्च नेता के चयन को लेकर मीडिया में चल रही खबरों का कोई आधिकारिक आधार नहीं है।
इस्राइल की धमकी से बढ़ा तनाव
इस घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान देते हुए कहा कि ईरान जिस भी व्यक्ति को अगला सुप्रीम लीडर चुनेगा, उसे “निशाने पर लिया जाएगा।” उनके इस बयान को क्षेत्रीय तनाव के संदर्भ में बेहद गंभीर माना जा रहा है। हाल के दिनों में ईरान और इस्राइल के बीच सैन्य टकराव और बयानबाजी तेज हुई है। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन की खबरों ने इस्राइल की ओर से तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया। रक्षा मंत्री के बयान के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या ईरान इस धमकी के दबाव में आया है और इसी कारण उसने उत्तराधिकारी की खबरों का खंडन किया है। हालांकि तेहरान की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया कि उसका रुख बाहरी दबाव से प्रभावित हुआ है।
मोजतबा खामेनेई को लेकर क्या थीं खबरें?
कुछ विदेशी और इस्राइली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी चुना गया है और वे जल्द ही सर्वोच्च नेता का पद संभाल सकते हैं। इन रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि विशेषज्ञ सभा के भीतर उत्तराधिकार को लेकर चर्चा अंतिम चरण में है और आने वाले घंटों में आधिकारिक घोषणा हो सकती है। हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया या आधिकारिक प्रवक्ताओं की ओर से इस संबंध में कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई।
संभावित दावेदारों में कई प्रमुख चेहरे
खामेनेई के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता के पद को संभालने वाले संभावित दावेदारों में कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं, जिनमें कट्टरपंथियों से लेकर उदारवादी तक शामिल हैं।
1. मोजतबा खामेनेई : ये अली खामेनेई के बेटे और शिया धर्मगुरु भी हैं। ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आइआरजीसी) के साथ इनके बहुत मजबूत संबंध हैं। इस्लामिक रिपब्लिक हमेशा से 'वंशानुगत शासन' का कट्टर विरोधी रहा है। यदि इन्हें चुना जाता है तो यह व्यवस्था की अपनी विचारधारा के विपरीत होगा, जिससे राजनीतिक असहजता पैदा हो सकती है।
2. अयातुल्ला अली रजा अराफी : वरिष्ठ शिया धर्मगुरु और अंतरिम सरकारी परिषद के सदस्य। खामेनेई ने खुद 2019 में इन्हें 'गार्जियन काउंसिल' के लिए चुना था। 2022 में ये 'असेंबली आफ एक्सपर्ट्स' के लिए चुने गए। वर्तमान में ये ईरान में मदरसों के एक बड़े नेटवर्क का नेतृत्व करते हैं।
3. हसन रूहानी : ईरान के पूर्व राष्ट्रपति (2013-2021) और तुलनात्मक रूप से उदारवादी चेहरा। ओबामा प्रशासन के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौते के पीछे इनका मुख्य हाथ था। 2024 में इन्हें 'असेंबली आफ एक्सपर्ट्स' के चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जिसकी इन्होंने कड़ी आलोचना की थी।
4. हसन खोमैनी : इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के सबसे प्रमुख पोते। इन्हें भी उदारवादी माना जाता है, लेकिन इन्होंने कभी कोई सरकारी पद नहीं संभाला है। वर्तमान में ये तेहरान में अपने दादा के मकबरे की देखरेख करते हैं।
5. अयातुल्ला मोहम्मद मेहदी मीरबाघेरी : कट्टरपंथियों के बीच बेहद लोकप्रिय और 'असेंबली आफ एक्सपर्ट्स' के सदस्य। ये परमाणु हथियारों के समर्थक माने जाने वाले दिवंगत अयातुल्ला मेस्बाह यजदी के करीबी रहे हैं। इन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूलों को बंद करने को एक "साजिश" करार दिया था। वर्तमान में ये कोम स्थित इस्लामिक कल्चरल सेंटर के प्रमुख हैं।
ईरानी वाणिज्य दूतावास का स्पष्ट बयान
भारत स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। पोस्ट में कहा गया, “ईरान की विशेषज्ञ सभा द्वारा नेतृत्व के लिए चुने गए संभावित उम्मीदवारों के बारे में मीडिया में प्रसारित हो रही खबरों का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं है और इन्हें आधिकारिक तौर पर खारिज किया जाता है।” इस बयान से यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई कि उत्तराधिकार की प्रक्रिया को लेकर कोई औपचारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ईरान में सर्वोच्च नेता चयन की प्रक्रिया
ईरान में सर्वोच्च नेता का चयन ‘विशेषज्ञ सभा’ करती है, जो धार्मिक विद्वानों की एक निर्वाचित संस्था है। यह संस्था संविधान के तहत सर्वोच्च नेता की नियुक्ति और आवश्यकता पड़ने पर उनके पद से हटाने की अधिकार रखती है। सर्वोच्च नेता देश के राजनीतिक और सैन्य ढांचे में सर्वोच्च पद होता है, जिसके पास सेना, न्यायपालिका और प्रमुख नीतिगत फैसलों पर अंतिम अधिकार होता है। मोजतबा खामेनेई लंबे समय से राजनीतिक और धार्मिक हलकों में सक्रिय माने जाते हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक रूप से उत्तराधिकारी घोषित किए जाने की कोई पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
ईरानी विदेश मंत्री का ट्रंप पर हमला
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि जटिल परमाणु वार्ताओं को “रियल एस्टेट सौदे” की तरह लेने और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने से कूटनीति कमजोर हुई है। अराघची ने लिखा, “जब जटिल परमाणु वार्ताओं को रियल एस्टेट डील की तरह लिया जाता है और बड़े-बड़े झूठ हकीकत पर परदा डाल देते हैं, तब अवास्तविक उम्मीदें जन्म लेती हैं। नतीजा गुस्से और हठ में बातचीत की मेज पर ही बमबारी।” उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने न केवल कूटनीति बल्कि उन अमेरिकी नागरिकों से भी विश्वासघात किया जिन्होंने उन्हें चुना था।
क्षेत्रीय परिदृश्य और कूटनीतिक असर
मध्य-पूर्व में पहले से ही बढ़ते सैन्य तनाव के बीच नेतृत्व परिवर्तन की खबरों और इस्राइल की चेतावनी ने माहौल को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, इस्राइल का सार्वजनिक रूप से “निशाना बनाने” की बात कहना कूटनीतिक मर्यादाओं के लिहाज से भी विवादास्पद माना जा रहा है। हालांकि फिलहाल ईरान की ओर से साफ संकेत है कि उत्तराधिकार को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया गया है।
खबरें निराधार
स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विशेषज्ञ सभा औपचारिक रूप से किसी उत्तराधिकारी की घोषणा करती है या नहीं। ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते टकराव, अमेरिका की भूमिका और परमाणु वार्ताओं की पृष्ठभूमि में यह मुद्दा केवल आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक प्रभाव भी रखता है। फिलहाल तेहरान का आधिकारिक रुख स्पष्ट है—मोजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता चुने जाने की खबरें निराधार हैं। लेकिन क्षेत्रीय हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में बना रह सकता है।