ईरान युद्ध का असर संयुक्त राष्ट्र तक: वरिष्ठ राजनयिक मोहम्मद सफा का इस्तीफा, ‘न्यूक्लियर खतरे’ की चेतावनी
सफा ने अपने बयान में ‘न्यूक्लियर विंटर’ (परमाणु हमले के बाद वैश्विक जलवायु पर पड़ने वाला गंभीर प्रभाव) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा इस खतरे को दुनिया के सामने लाने की कोशिश है, ताकि समय रहते इसे टाला जा सके।;
‘ताकतवर लॉबी’ और सेंसरशिप के आरोप
सफा ने यह भी आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र के कुछ वरिष्ठ अधिकारी एक “ताकतवर लॉबी” के प्रभाव में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, इन अधिकारियों ने उनकी आवाज दबाने की कोशिश की और उन्हें “सेंसर” किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह सेंसरशिप सीधे संगठन की नीति के तहत नहीं, बल्कि कुछ प्रभावशाली अधिकारियों के जरिए की गई, जिन्होंने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया।
तेहरान की तस्वीर के साथ भावनात्मक अपील
अपने पोस्ट में सफा ने तेहरान शहर की एक तस्वीर साझा करते हुए युद्ध के खतरों को लेकर भावनात्मक अपील भी की। उन्होंने लिखा कि तेहरान कोई सुनसान इलाका नहीं, बल्कि लाखों लोगों का घर है, जहां परिवार, बच्चे और आम नागरिक रहते हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध की कल्पना करने वाले लोग इस मानवीय पहलू को नजरअंदाज कर रहे हैं। सफा ने दुनिया के अन्य बड़े शहरों जैसे वॉशिंगटन, पेरिस, लंदन और बर्लिन का उदाहरण देते हुए लोगों से सोचने को कहा कि अगर वहां इस तरह का हमला हो तो क्या स्थिति होगी।
‘न्यूक्लियर विंटर’ की चेतावनी
सफा ने अपने बयान में ‘न्यूक्लियर विंटर’ (परमाणु हमले के बाद वैश्विक जलवायु पर पड़ने वाला गंभीर प्रभाव) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा इस खतरे को दुनिया के सामने लाने की कोशिश है, ताकि समय रहते इसे टाला जा सके।
विरोध प्रदर्शनों का किया जिक्र
उन्होंने हाल ही में अमेरिका में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने “No Kings” जैसे नारों के साथ प्रदर्शन किया था। सफा का कहना है कि आम लोगों को इस मुद्दे की गंभीरता समझनी चाहिए और शांति के लिए आवाज उठानी चाहिए।
‘तीन साल से था इस्तीफे का विचार’
सफा ने खुलासा किया कि वह 2023 में ही इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने तीन साल तक इंतजार किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे “अब कदम उठाएं” और इस संदेश को पूरी दुनिया में फैलाएं, क्योंकि यह केवल सरकारों का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का मुद्दा है।
धमकियों और असुरक्षा का दावा
अपने पत्र में सफा ने यह भी दावा किया कि उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिलीं। उनका कहना है कि इस दौरान संयुक्त राष्ट्र ने उनका साथ नहीं दिया और उन्हें “अकेला छोड़ दिया गया।”