ट्रंप बोले- ईरान से किसी भी हाल में यूरेनियम लेंगे, बुधवार तक समझौता नहीं हुआ तो सीजफायर खत्म

ट्रंप ने बातचीत की समयसीमा को लेकर भी सख्त संकेत दिए। उन्होंने कहा कि यदि बुधवार तक कोई बड़ा समझौता नहीं होता है, तो मौजूदा सीजफायर खत्म किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी।;

Update: 2026-04-18 09:20 GMT

वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाया है। एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर के एनरिच्ड यूरेनियम को हासिल करना चाहता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत ठहराव का शिकार होती दिख रही है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका इस मुद्दे पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। उनका कहना था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना ही इस पूरे कूटनीतिक प्रयास का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

सीजफायर पर खतरा


ट्रंप ने बातचीत की समयसीमा को लेकर भी सख्त संकेत दिए। उन्होंने कहा कि यदि बुधवार तक कोई बड़ा समझौता नहीं होता है, तो मौजूदा सीजफायर खत्म किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो फिर से बमबारी जैसे सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ अमेरिका सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति पर भी काम कर रहा है।

वार्ता में गतिरोध, पाकिस्तान वार्ता बेनतीजा


हाल ही में पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता का दौर चला था, जिससे कुछ उम्मीदें जगी थीं। लेकिन यह बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बैकचैनल डिप्लोमेसी के बावजूद कई अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम संवर्धन, प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी भी विवाद के केंद्र में हैं, जिन पर समाधान निकालना आसान नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट: खुला भी, खतरे में भी


दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति बेहद उलझी हुई बनी हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि फिलहाल यह जलमार्ग सभी व्यापारिक जहाजों के लिए खुला है और आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। लेकिन इसके उलट, ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका द्वारा नाकेबंदी जारी रहती है, तो होर्मुज स्ट्रेट को बंद किया जा सकता है। इस विरोधाभासी रुख ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

जहाजों में बढ़ा डर, आवाजाही प्रभावित

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्पष्टता की कमी का असर समुद्री यातायात पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई व्यापारिक जहाज इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं। कुछ जहाजों ने रास्ता बदल लिया है, जबकि कुछ ने बीच में ही अपनी यात्रा रोक दी या वापस लौटने का फैसला किया।

हालांकि कुछ जहाजों ने ईरान की घोषणा के बाद आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन क्षेत्र में अस्थिरता और विरोधाभासी बयानों के चलते जोखिम लेने से बचा जा रहा है। यह स्थिति वैश्विक सप्लाई चेन और तेल आपूर्ति पर असर डाल सकती है।

अमेरिकी नाकेबंदी जारी, फैसला ट्रंप के हाथ में

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCC) ने साफ कर दिया है कि ईरान पर लगाई गई नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक राष्ट्रपति ट्रंप इसे हटाने का आदेश नहीं देते। इसका मतलब है कि भले ही बातचीत आगे बढ़े, लेकिन दबाव बनाए रखने की अमेरिकी रणनीति जारी रहेगी।

ट्रंप ने यह भी कहा कि समझौते में अब कोई बड़ी बाधा नहीं बची है, लेकिन अंतिम निर्णय तक पहुंचने के लिए अभी और बातचीत की जरूरत है।

ईरान की चेतावनी और सख्त रुख

ईरान ने भी अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है। उसने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए साफ कहा है कि वह दबाव में आकर कोई निर्णय नहीं लेगा। साथ ही, यह भी चेतावनी दी है कि यदि नाकेबंदी जारी रही, तो वह होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक विकल्पों का इस्तेमाल कर सकता है।

यह स्थिति दोनों देशों के बीच टकराव को और बढ़ा सकती है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ने की आशंका है।

सीजफायर के बीच लोगों की घर वापसी

इसी बीच, इजराइल और लेबनान के बीच लागू सीजफायर का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। लेबनान में हजारों लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। यह संकेत है कि क्षेत्र में आंशिक रूप से ही सही, लेकिन तनाव कम हो रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच मूल विवाद का समाधान नहीं होता, तब तक स्थायी शांति की उम्मीद करना मुश्किल है।

नाजुक मोड़ पर कूटनीति

कुल मिलाकर, मौजूदा स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक तरफ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, तो दूसरी ओर सैन्य चेतावनियां भी दी जा रही हैं। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता, नाकेबंदी और यूरेनियम विवाद ने हालात को और जटिल बना दिया है।

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