‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ पर बन सकती है सहमति, सीजफायर की कोशिशें तेज, लेकिन ईरान ने होर्मुज पर फंसाया पेच

इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने का भी प्रावधान शामिल है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को सामान्य किया जा सके। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिकी और ईरानी नेताओं के साथ रातभर बातचीत कर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश की है।

Update: 2026-04-06 09:29 GMT

तेहरान/इस्‍लामाबाद/वॉशिंगटन: US Iran Talks: पश्चिम एशिया में जारी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज दोनों देशों के बीच युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर सहमति बनने की संभावना है। इस दिशा में पाकिस्तान ने एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों को एक प्रस्ताव सौंपा है, जिसे अस्थायी तौर पर ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ नाम दिया गया है।

क्या है ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’?

टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को दो चरणों में बांटा गया है। पहला चरण: तत्काल प्रभाव से सीजफायर लागू करना, दूसरा चरण: 15 से 20 दिनों के भीतर स्थायी समझौते को अंतिम रूप देना। इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने का भी प्रावधान शामिल है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को सामान्य किया जा सके। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिकी और ईरानी नेताओं के साथ रातभर बातचीत कर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश की है।

45 दिन के युद्धविराम का भी प्रस्ताव

इससे पहले अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म एक्सिओस और एपी की रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया था कि दोनों देशों के बीच 45 दिन का सीजफायर लागू करने पर चर्चा चल रही है।

इस प्रस्ताव के तहत

  • 45 दिनों तक संघर्षविराम रहेगा
  • इस दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी
  • होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा
  • इस प्रक्रिया में पाकिस्तान के अलावा मिस्र और तुर्किये भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

ईरान की शर्तें और आपत्तियां

हालांकि, ईरान ने कुछ अहम मुद्दों पर अपनी सख्त स्थिति बनाए रखी है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक तेहरान को पाकिस्तान का प्रस्ताव मिला है और उस पर विचार किया जा रहा है लेकिन अस्थायी सीजफायर के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को तैयार नहीं है। ईरान का कहना है कि उस पर किसी तरह का दबाव या समयसीमा (डेडलाइन) थोपकर युद्धविराम नहीं कराया जा सकता। ईरानी अधिकारियों को यह भी संदेह है कि अमेरिका स्थायी समाधान को लेकर गंभीर नहीं है।

अल्टीमेटम का बढ़ता दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिया गया अल्टीमेटम इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा रहा है। ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो उसके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। यह समयसीमा अब समाप्ति के करीब है, जिससे दोनों पक्षों पर दबाव बढ़ गया है। ईरान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह किसी भी तरह के दबाव में आकर निर्णय नहीं लेगा।

मध्यस्थ देशों की सक्रिय भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये सक्रिय रूप से मध्यस्थता कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिका के विशेष दूत और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ अलग-अलग स्तर पर बातचीत की है। इन प्रयासों का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच संवाद कायम रखना और किसी भी तरह युद्धविराम सुनिश्चित करना है।

संभावित समझौते की मुख्य शर्तें

रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इसमें कई अहम बिंदु शामिल हो सकते हैं:

  • तत्काल युद्धविराम
  • होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना
  • परमाणु कार्यक्रम पर संभावित प्रतिबंध
  • ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत
  • जब्त संपत्तियों की रिहाई
    हालांकि, इन शर्तों पर अंतिम सहमति अभी बाकी है।

अगले 48 घंटे अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 48 घंटे इस पूरे समझौते के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर इस दौरान कोई सहमति नहीं बनती, तो संघर्ष और तेज हो सकता है, जिसका असर न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ेगा, खासतौर पर तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर।

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