अंतरिक्ष से चमकी पृथ्वी की खूबसूरती: आर्टेमिस II के यात्रियों ने कैद किया अद्भुत नजारा, दिल छूने वाली तस्वीरें

मिशन के कमांडर रीड वाइजमैन ने जो तस्वीरें साझा की हैं, वे बेहद खास मानी जा रही हैं। पहली तस्वीर में ओरियन कैप्सूल की खिड़की से पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा नजर आता है, जबकि दूसरी तस्वीर में पूरी पृथ्वी दिखाई देती है।

Update: 2026-04-04 05:22 GMT
न्‍यूयॉर्क। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का महत्वाकांक्षी आर्टेमिस-II मिशन इन दिनों इतिहास रच रहा है। करीब पांच दशकों के बाद इंसानों को फिर से चांद की दिशा में ले जा रहा यह मिशन न केवल तकनीकी दृष्टि से अहम है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी पूरी मानवता के लिए एक बड़ा क्षण बन गया है। इसी बीच अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा अंतरिक्ष से भेजी गई पृथ्वी की मनमोहक तस्वीरों ने दुनिया भर के लोगों को रोमांचित कर दिया है।



 

अंतरिक्ष से दिखी पृथ्वी की अनोखी झलक

मिशन के कमांडर रीड वाइजमैन ने जो तस्वीरें साझा की हैं, वे बेहद खास मानी जा रही हैं। पहली तस्वीर में ओरियन कैप्सूल की खिड़की से पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा नजर आता है, जबकि दूसरी तस्वीर में पूरी पृथ्वी दिखाई देती है। इस तस्वीर में नीले महासागर, सफेद बादलों की परतें और हरे रंग की ऑरोरा (उत्तरी रोशनी) एक साथ चमकते हुए नजर आते हैं। नासा के अनुसार, अंतरिक्ष से पृथ्वी का यह दृश्य बेहद भावुक और विस्मयकारी था।

“इस तस्वीर में पूरी मानवता समाई है”

नासा की अधिकारी लाकीशा हॉकिन्स ने इन तस्वीरों को लेकर कहा कि यह सोचकर ही रोमांच होता है कि इस फ्रेम में चार अंतरिक्ष यात्रियों को छोड़कर पूरी मानवता दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मिशन तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है और अब तक सभी सिस्टम सुचारु रूप से काम कर रहे हैं।





 चांद की ओर तेजी से बढ़ रहा है मिशन

आर्टेमिस-II का दल इस समय पृथ्वी से करीब 1.8 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है और चंद्रमा की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्हें अभी लगभग 2.4 लाख किलोमीटर का सफर और तय करना है। अनुमान है कि अंतरिक्ष यात्री सोमवार तक चांद के करीब पहुंच जाएंगे, जहां वे उसकी परिक्रमा करेंगे।

चांद के पास जाकर लौटेगा मिशन

इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं—रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन। ये सभी ओरियन कैप्सूल में सवार होकर चांद के चारों ओर घूमकर वापस पृथ्वी पर लौटेंगे। खास बात यह है कि यह मिशन चांद पर लैंडिंग के लिए नहीं है, बल्कि एक परीक्षण उड़ान है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के पास जाकर यू-टर्न लेंगे।



 


दिन और रात दोनों में चमकती है पृथ्वी

कमांडर वाइजमैन ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब उन्होंने पहली बार पूरी पृथ्वी को देखा, तो वह क्षण इतना अद्भुत था कि सभी अंतरिक्ष यात्री कुछ समय के लिए शांत हो गए। उन्होंने कहा कि पृथ्वी न केवल दिन में बल्कि रात में भी उतनी ही खूबसूरत दिखाई देती है। आधे हिस्से पर दिन और आधे पर रात का दृश्य अंतरिक्ष से बेहद आकर्षक लगता है।

पहली बार अंतरिक्ष में ले जाए गए आईफोन

इस मिशन की एक और खास बात यह है कि अंतरिक्ष यात्रियों को पहली बार अपने व्यक्तिगत स्मार्टफोन आईफोन ले जाने की अनुमति दी गई है। नासा ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि अंतरिक्ष यात्री भारी-भरकम कैमरों के बजाय स्मार्टफोन से भी तस्वीरें और वीडियो कैद कर सकें। हालांकि ये फोन एयरोप्लेन मोड में रखे गए हैं, ताकि अंतरिक्षयान के सिस्टम पर कोई असर न पड़े। जब यह दल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के पास से गुजरेगा, तब वे वहां के वाई-फाई से जुड़कर तस्वीरें और ईमेल भेज सकेंगे।

चांद दिखेगा ‘बास्केटबॉल’ जैसा

जब यह मिशन चंद्रमा के करीब पहुंचेगा, तब अंतरिक्ष यात्रियों को चांद हाथ की दूरी पर रखी बास्केटबॉल जितना बड़ा दिखाई देगा। वे बारी-बारी से कैप्सूल की खिड़कियों से इस नजारे को कैमरे में कैद करेंगे। अनुकूल रोशनी की स्थिति में वे चंद्रमा की कुछ ऐसी विशेषताओं को भी देख सकते हैं, जिन्हें पहले मानव आंखों ने नहीं देखा।

तकनीकी चुनौती: शौचालय में आई दिक्कत

मिशन के दौरान एक तकनीकी समस्या भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ओरियन कैप्सूल में लगे शौचालय में खराबी की सूचना मिशन कंट्रोल को दी गई है। नासा के अधिकारियों ने इसे “कंट्रोलर की समस्या” बताया है और कहा है कि इसे ठीक करने में कुछ समय लगेगा। गौरतलब है कि यह पहला अवसर है जब किसी चंद्र मिशन में आधुनिक शौचालय सुविधा दी गई है। अपोलो मिशनों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष थैलों का उपयोग करना पड़ता था।

50 साल बाद फिर चांद की ओर कदम

आर्टेमिस-II मिशन को 1970 के दशक के अपोलो मिशनों के बाद इंसानों की चांद की दिशा में पहली बड़ी वापसी माना जा रहा है। 2 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा से लॉन्च हुए इस मिशन की अवधि लगभग 10 दिन है। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से करीब 4.06 लाख किलोमीटर दूर तक जाएंगे, जो अब तक की सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष यात्रा में से एक होगी।

भविष्य के मिशनों की तैयारी

यह मिशन भविष्य में चांद पर मानव लैंडिंग के लिए एक अहम कदम है। इसके जरिए नासा उन तकनीकों और प्रणालियों का परीक्षण कर रहा है, जो आने वाले आर्टेमिस-III जैसे मिशनों में उपयोग की जाएंगी।

मानवता की नई उड़ान का प्रतीक

आर्टेमिस-II केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि मानवता की नई उड़ान का प्रतीक है। अंतरिक्ष से पृथ्वी की अद्भुत तस्वीरें, चांद के करीब पहुंचने का रोमांच और नई तकनीकों का परीक्षण ये सभी पहलू इस मिशन को ऐतिहासिक बना रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि यह मिशन अपने अगले चरणों को कितनी सफलता के साथ पूरा करता है और मानव को फिर से चांद की सतह तक पहुंचाने की दिशा में कितनी प्रगति करता है।

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