मास्को। दुनिया भर में तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच रूस ने अपनी सामरिक ताकत का प्रदर्शन तेज कर दिया है। इसी कड़ी में रूसी न्यूक्लियर मिसाइल फोर्स ने साइबेरिया के निर्जन इलाकों में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास शुरू किया है। इस अभ्यास का केंद्र बिंदु ‘यार्स’ (Yars) इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जो लंबी दूरी तक परमाणु हमले में सक्षम है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस अभ्यास की पुष्टि करते हुए बताया कि यह युद्धाभ्यास देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
10,000 किमी से अधिक मारक क्षमता वाली ‘यार्स’ मिसाइल
‘यार्स’ इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल रूस की सबसे उन्नत परमाणु हथियार प्रणालियों में से एक मानी जाती है। यह मिसाइल 10,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक परमाणु वारहेड ले जाकर हमला करने में सक्षम है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी मारक क्षमता इतनी व्यापक है कि यह अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों को अपनी जद में ले सकती है। यही कारण है कि इस अभ्यास को वैश्विक स्तर पर एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
हर परिस्थिति में हमला करने की तैयारी
रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस सैन्य अभ्यास में मिसाइल लांचरों को लगातार स्थान बदलते हुए संचालन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी युद्ध परिस्थिति में, चाहे दुश्मन का हमला हो या प्रतिकूल हालात, रूस अपनी जवाबी कार्रवाई को अंजाम दे सके। इस दौरान मिसाइल फोर्स न केवल आक्रामक हमले का अभ्यास कर रही है, बल्कि दुश्मन के हमलों के बीच सुरक्षित रहते हुए जवाबी हमला करने की रणनीतियों को भी परख रही है। यह अभ्यास मोबाइल लॉन्च सिस्टम की क्षमताओं को मजबूत करने पर भी केंद्रित है, जिससे मिसाइलों को ट्रैक करना दुश्मन के लिए और मुश्किल हो जाता है।
यूक्रेन युद्ध और नाटो दबाव का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के इस कदम के पीछे यूक्रेन युद्ध और नाटो देशों के बढ़ते दबाव की अहम भूमिका है। यूक्रेन संघर्ष के बाद से रूस लगातार अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है। नाटो की सक्रियता और पूर्वी यूरोप में उसकी बढ़ती सैन्य मौजूदगी को देखते हुए रूस ने अपने परमाणु और रणनीतिक बलों के अभ्यास की आवृत्ति और स्तर दोनों बढ़ा दिए हैं। हालांकि, इस बार का अभ्यास पहले की तुलना में अधिक व्यापक और उन्नत बताया जा रहा है, जो रूस की बढ़ती सैन्य सतर्कता को दर्शाता है।
पश्चिमी देशों को ‘संदेश’
रणनीतिक मामलों के जानकार इस अभ्यास को केवल नियमित सैन्य ड्रिल नहीं, बल्कि एक स्पष्ट भू-राजनीतिक संदेश मान रहे हैं। उनके अनुसार, रूस इस अभ्यास के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को यह दिखाना चाहता है कि वह किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है। यह कदम वैश्विक शक्ति संतुलन की मौजूदा स्थिति को भी रेखांकित करता है, जहां बड़ी शक्तियां अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रही हैं।
जापान की सैन्य सक्रियता पर रूस की आपत्ति
इस बीच रूस ने जापान की बढ़ती सैन्य सक्रियता पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जापान द्वारा एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल तैनात किए जाने को रूस ने “जरूरत से ज्यादा” कदम बताया है। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि जापान अपने संविधान की सीमाओं से आगे बढ़कर आक्रामक सैन्य नीति अपना रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ता तनाव
जापान का यह कदम ऐसे समय में आया है जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। चीन, उत्तर कोरिया और अब रूस-जापान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। रूस का मानना है कि जापान की सैन्य तैयारी उसके वास्तविक खतरे से कहीं अधिक है, जो संतुलन बिगाड़ सकती है।