वाशिंगटन/कोपेनहेगेन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क सहित आठ यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी ने अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में अब तक का सबसे गंभीर तनाव पैदा कर दिया है। यह विवाद केवल व्यापारिक शुल्क तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, नाटो की एकता और आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे बड़े रणनीतिक सवाल शामिल हो गए हैं। यूरोपीय संघ (ईयू) ने इस चुनौती का सामूहिक और सख्त जवाब देने के संकेत दे दिए हैं।
ईयू का दोटूक संदेश
यूरोपीय संसद की अध्यक्ष राबर्टा मेत्सोला ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड न तो बिक्री के लिए है और न ही उस पर किसी बाहरी दबाव से फैसला बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना अंतरराष्ट्रीय कानून और यूरोपीय मूल्यों का अनिवार्य हिस्सा है। मेत्सोला ने चेतावनी दी कि टैरिफ की धमकियां आर्कटिक क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और इससे वैश्विक शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है।
आठ यूरोपीय देशों की एकजुटता
डेनमार्क के समर्थन में आठ यूरोपीय देशों डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नार्वे, स्वीडन और ब्रिटेन ने संयुक्त बयान जारी किया। इन देशों ने साफ कहा कि वे ग्रीनलैंड और वहां की जनता के साथ खड़े हैं। बयान में चेताया गया कि अमेरिकी टैरिफ की धमकी ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों को कमजोर करेगी और दोनों पक्षों के बीच खतरनाक गिरावट का जोखिम पैदा करेगी।
ईयू–अमेरिका व्यापार समझौते पर ब्रेक
विवाद के बीच यूरोपीय संघ ने जुलाई 2025 में घोषित ईयू–अमेरिका व्यापार समझौते की पुष्टि प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। यह कदम अमेरिका को स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि यूरोप आर्थिक दबाव की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही, यूरोपीय संसद में अमेरिका के खिलाफ एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट (एसीआई) लागू करने की मांग तेज हो गई है, जिसके जरिए किसी भी प्रकार के आर्थिक ब्लैकमेल का जवाब सामूहिक रूप से दिया जा सके।
क्या कहा अमेरिकी राष्ट्रपति ने
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यदि ग्रीनलैंड की “पूर्ण और अंतिम खरीद” पर सहमति नहीं बनी, तो 1 फरवरी 2026 से आठ यूरोपीय देशों से अमेरिका आने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने आगे चेताया कि 1 जून 2026 से यह शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। ट्रंप ने इसे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा और तर्क दिया कि ग्रीनलैंड में चीन और रूस की बढ़ती दिलचस्पी अमेरिका के लिए रणनीतिक खतरा है।
यूरोपीय नेतृत्व की सख्त प्रतिक्रिया
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फान डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्ता ने संयुक्त बयान में कहा कि यूरोप अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने दोहराया कि किसी भी तरह का आर्थिक दबाव यूरोप को अपने मूल सिद्धांतों से पीछे नहीं हटाएगा।
चीन और रूस को होगा सबसे ज्यादा फायदा
ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने चेतावनी दी कि ट्रंप की धमकी से चीन और रूस सबसे ज्यादा लाभ उठाएंगे। उनके अनुसार, सहयोगियों के बीच फूट का सीधा फायदा विरोधी ताकतों को मिलेगा। कालास ने कहा कि टैरिफ युद्ध से अमेरिका और यूरोप दोनों की अर्थव्यवस्थाएं कमजोर होंगी और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के साझा प्रयासों पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
जर्मनी और नीदरलैंड्स का कड़ा रुख
जर्मनी के वित्त मंत्री और वाइस चांसलर लार्स क्लिंगबेल ने साफ कहा कि जर्मनी और उसके यूरोपीय साझेदारों को ब्लैकमेल नहीं किया जा सकता। नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वैन वील ने भी ट्रंप के रवैये को खुला आर्थिक दबाव बताया और कहा कि इससे न ग्रीनलैंड का भला होगा, न नाटो का।
डेनमार्क की प्रतिक्रिया: “हम स्तब्ध हैं”
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने कहा कि वे ट्रंप की धमकी से स्तब्ध हैं और ईयू के साथ मिलकर आगे की रणनीति पर काम कर रहे हैं। नार्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने भी कहा कि सहयोगियों के बीच ऐसी भाषा और रवैये के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
फ्रांस, ब्रिटेन और आयरलैंड की चेतावनी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दोहराया कि टैरिफ की धमकियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और जरूरत पड़ने पर यूरोप सामूहिक जवाब देगा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि नाटो की सामूहिक सुरक्षा के नाम पर सहयोगियों पर टैरिफ लगाना गलत है। आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने चेताया कि ट्रंप किसी मुगालते में न रहें। अगर टैरिफ लगाया गया, तो यूरोप निश्चित रूप से पलटवार करेगा।
पुतिन को मिलेगी सबसे ज्यादा खुशी
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने और भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड को लेकर किसी तरह की आक्रामक कार्रवाई की, तो इससे सबसे ज्यादा खुशी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को होगी। सांचेज के मुताबिक, ऐसा कदम नाटो की एकता को तोड़ने वाला साबित हो सकता है और यूक्रेन पर रूस के हमले को परोक्ष वैधता देगा।
ब्लैकमेल स्वीकार नहीं
स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने ट्रंप की नीति को खुला “ब्लैकमेल” करार दिया। फिनलैंड और नार्वे के नेताओं ने भी कहा कि सहयोगियों के बीच मतभेदों को धमकियों से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से सुलझाया जाना चाहिए।
ईयू की आपात बैठक
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईयू के 27 सदस्य देशों के राजदूतों की आपात बैठक बुलाई गई है। इसमें संभावित जवाबी कदमों, व्यापारिक प्रतिशोध और कूटनीतिक रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
अमेरिका के भीतर भी विरोध
ट्रंप की नीति को अमेरिका में भी सर्वसम्मति का समर्थन नहीं मिल रहा। डेमोक्रेट सीनेटर मार्क केली ने कहा कि इससे सहयोगियों के बीच दरार पड़ेगी और अमेरिकी नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह नीति अमेरिका की साख और वैश्विक नेतृत्व को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
टैरिफ से आगे की लड़ाई
ग्रीनलैंड विवाद अब केवल एक द्वीप या व्यापारिक शुल्क का मुद्दा नहीं रहा। यह अमेरिका और यूरोप के बीच विश्वास, साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा ढांचे की परीक्षा बन गया है। यदि यह टकराव बढ़ता है, तो इसके परिणाम नाटो, यूक्रेन युद्ध, आर्कटिक सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक दूरगामी होंगे। आने वाले सप्ताह तय करेंगे कि यह संकट संवाद से सुलझता है या ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में स्थायी दरार छोड़ जाता है।