चार साल पुरानी स्थिति में पहुंंची देश की जीडीपी

वित्त वर्ष 2021-22 की जून में खत्म होने वाली पहली तिमाही के लिए जीडीपी के शानदार आंकड़े सामने आए हैं. इससे यह संकेत मिल रहा है कि कोविड की दूसरी लहर के बाद इकोनॉमी पटरी पर लौट आई है. देश अभी भी मंदी के दौर में ही चल रहा है. जीडीपी दौड़ नहीं रही बल्कि चार साल पीछे चल रही है.

Update: 2021-09-01 19:55 GMT

देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP की ग्रोथ को लेकर कल सरकार की ओर से बड़ी खबर दी है. सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही जो अप्रैल से जून के बीच की मानी जाती है. उसमें GDP ग्रोथ 20.1 फीसदी रही है. देश में उदारीकरण की शुरूआत होने के बाद जीडीपी में किसी भी तिमाही की ये सबसे तेज बढ़ोत्तरी है. लेकिन यदि पिछले साल के आंकड़ों को देखे तो साफ समझ में आ जाएगा कि देश की अर्थव्यवस्था अभी भी मंदी में फंसी हुई है. पिछले साल यानी 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 23.9 फीसदी निगेटिव थी. यानी इतनी गिरावट देश की जीडीपी में आई थी. इसके लिए कोरोना महामारी को बड़ा कारण बताया गया. क्योंकि उस समय देश लॉकडाउन से गुजर रहा था. ऐसे में 2021-22 में जीडीपी में तेजी पहले से ही तय थी. लेकिन यदि हम तुलना 2019—20 की पहली तिमाही से करे तो इस साल की पहली तिमाही में 20.1 फीसदी की जबरदस्त तेजी की जगह 9.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की जाएगी. जिसे बड़ी गिरावट माना जा सकता है. अप्रैल से जून 2019-20 की तिमाही में देश की कुल जीडीपी 35.66 लाख करोड़ रुपये थी. जबकि मंगलवार को सरकार ने जो आंकड़े जारी किए उसके अनुसार देश की कुल जीडीपी अभी 32.38 लाख करोड़ रुपये है. यानी दो साल पहले के मुकाबले जीडीपी करीब 9 फीसदी कम है. यदि पुराने आंकड़ों को देखे तो सच्चाई सामने आ जाती हैं. देश के कुल उत्पादन के जो आंकड़े सरकार ने अभी जारी किए वह चार साल पहले 2017-18 की पहली तिमाही के 31.18 लाख करोड़ रुपये के करीब ही है. यानी देश का कुल उत्पादन अभी चार साल पहले के लेवल पर ही है.

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