मेरे पास नैतिक आयोग नियुक्त करने या भंग करने का अधिकार : बत्रा

भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष डॉ नरेंद्र ध्रुव बत्रा और महासचिव राजीव मेहता के बीच घमासान अब अधिकारों की जंग में बदलता जा रहा है

Update: 2020-05-29 00:48 GMT

नई दिल्ली। भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष डॉ नरेंद्र ध्रुव बत्रा और महासचिव राजीव मेहता के बीच घमासान अब अधिकारों की जंग में बदलता जा रहा है।

बत्रा ने आईओए के नैतिक आयोग को भंग कर दिया था जबकि मेहता ने आईओए के नैतिक आयोग को भंग करने के बत्रा के फैसले को ‘अवैध’ ही ठहरा दिया था और उसे बहाल कर दिया था। लेकिन बत्रा ने अपने नए पत्र में दावा किया है कि आईओए का संविधान उन्हें किसी समिति या आयोग का गठन करने या भंग करने का अधिकार देता है तथा इसके लिए कार्यकारी परिषद या आम सभा की मंजूरी की जरूरत होती है।

बत्रा ने 19 मई को नैतिक आयोग को भंग किया था जबकि मेहता ने मंगलवार को बत्रा के फैसले को अवैध ठहराकर बदल दिया था। मेहता का कहना था कि आयोग के चार साल के कार्यकाल को 2018 में आम सभा में मंजूर किया गया था जिस पर बत्रा के हस्ताक्षर थे और आईओए अध्यक्ष इसे दो साल बाद ही भंग नहीं कर सकते हैं। लेकिन बत्रा ने मेहता को लिखे अपने ताजा पत्र में कहा कि उनके पास आयोग के सदस्यों को नियुक्त करने या हटाने का अधिकार है।

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