जानकारी के बाद ही करे योग नहीं तो पड़ सकता है भारी
नई दिल्ली, योग शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद है, लेकिन गलत तरीके से किया गया योग शरीर को लाभ पहुंचाने की जगह नुकसान भी कर सकता है। अक्सर लोग बिना किसी ट्रेनर या सही जानकारी के योगाभ्यास शुरू कर देते हैं, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में दर्द और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।;
नई दिल्ली, योग शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद है, लेकिन गलत तरीके से किया गया योग शरीर को लाभ पहुंचाने की जगह नुकसान भी कर सकता है। अक्सर लोग बिना किसी ट्रेनर या सही जानकारी के योगाभ्यास शुरू कर देते हैं, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में दर्द और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए योग शुरू करने से पहले उसके सही नियम, तरीका और सावधानियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने योगासन को लेकर सावधानियां बरतने की हिदायत दी। उनके अनुसार, योग आमतौर पर सुरक्षित होता है, जब इसे सही तरीके से सीखा और जरूरी सावधानियों के साथ किया जाए। जबरदस्ती कोई आसन करना, अपनी क्षमता से ज्यादा देर तक सांस रोकना या सफाई की क्रियाओं को गलत तरीके से करना नुकसान पहुंचा सकता है।
इसके लिए बेहद जरूरी है कि आप अपनी शारीरिक सीमाओं को समझें, अपनी मेडिकल कंडीशन के बारे में अपने योग थेरपिस्ट को बताएं और किसी योग्य योग एक्सपर्ट या सर्टिफाइड इंस्ट्रक्टर की देखरेख में ही सही तकनीक सीखें। हमेशा जागरूकता के साथ अभ्यास करें और बताए गए नियमों का पालन करें।
सही तकनीक और सावधानियां क्यों जरूरी है - हर व्यक्ति के शरीर की बनावट और लचीलापन अलग-अलग होता है। इसलिए दूसरों को देखकर या रील्स और किताबों की नकल करके योगासन करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। बिना सही जानकारी के शरीर पर जबरदस्ती दबाव डालने, झटका देने या जल्दबाजी में आसन करने से मांसपेशियों में खिंचाव, मोच या गंभीर चोट लग सकती है। वहीं, अभ्यास के दौरान शरीर के किसी हिस्से में अचानक तेज दर्द या टीस उठे, तो तुरंत अभ्यास रोक देना चाहिए।
पद्मासन (कमल मुद्रा) जैसे साधारण दिखने वाले आसन तक में अभ्यास को लेकर सावधानी बरतनी पड़ती है। यदि आप इस आसन को आसान समझते हैं तो यह जरूरी है कि पैरों को जांघों पर रखने के लिए कभी भी जबरदस्ती या अत्यधिक जोर न लगाएं, इससे घुटनों या टखनों में मोच आ सकती है। अगर किसी भी अभ्यासकर्ता के घुटनों, कूल्हों या टखनों में पुरानी चोट या गंभीर दर्द है, तो यह आसन न करें। पैरों को जबरदस्ती मोड़ने से लिगामेंट में चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
शीर्षासन और सर्वांगासन जैसे एडवांस्ड स्तर के योगासनों में तो यह सावधानी बहुत अधिक बढ़ जाती है। बिना सही तकनीक के करने से सर्वाइकल स्पाइन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। जब इन आसनों में पूरे शरीर का भार गर्दन पर आ जाता है, तो अत्यधिक दबाव के कारण डिस्क हर्निएशन (सर्कना), नसों का दबना, लिगामेंट्स का टूटना और यहां तक कि गर्दन का फ्रैक्चर भी हो सकता है। मासिक धर्म, गर्भावस्था, चक्कर आना, तीव्र सिरदर्द, या हाल ही में हुई किसी सर्जरी के बाद भी ऐसे अभ्यास न करें।
अक्सर योगासनों में सावधानी बरतनी की सलाह दी जाती है, लेकिन प्राणायाम जैसी क्रियाओं को आमतौर पर सभी के लिए बहुत सुरक्षित माना जाता है। हालांकि यहां भी ध्यान देने वाली बात है कि यदि आप प्राणायाम करते हुए क्षमता से अधिक सांस रोकते हैं, तो मस्तिष्क को ऑक्सीजन की आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है, जिससे चक्कर आना जैसी समस्या हो सकती हैं। क्षमता बढ़ने पर ही इसे धीरे-धीरे बढ़ाएं। सांस रोकने की प्रक्रिया इतनी सहज होनी चाहिए कि जब आप सांस छोड़ें, तो वह बिल्कुल सामान्य और बिना किसी झटके के बाहर आए।
अगर किसी भी अभ्यासकर्ता को पहले से कोई चिकित्सीय स्थिति (जैसे हृदय रोग, मिर्गी, हर्निया, या गर्भावस्था) है, तो बिना प्रमाणित योग ट्रेनर के मार्गदर्शन के कुंभक का अभ्यास बिल्कुल न करें।
योगासन और प्राणायाम के अलावा दैनिक जीवन में योगाभ्यास करने वाले अपने श्वसन मार्ग के लिए विभिन्न सफाई क्रियाओं को करने का अभ्यास भी करते हैं। यह सफाई क्रियाएं 'नेति' कहलाती हैं। जैसे- जल नेति एंड सूत्र नेति।
योग और षट्कर्म में नासिका मार्ग की सफाई के लिए जल नेति और सूत्र नेति को बहुत प्रभावी माना गया है, लेकिन इन्हें गलत तरीके या बिना उचित सावधानी के किया जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और संक्रमण पैदा कर सकती हैं। जल नेति करते समय हमेशा मुंह से सांस लेनी चाहिए। यदि आप नाक से सांस लेते हैं, तो पानी साइनस या कान के अंदर जा सकता है जिससे दर्द, सिरदर्द या इंफेक्शन हो सकता है। जल नेति के तुरंत बाद नाक में रुका हुआ पानी बाहर निकालने के लिए हल्का कपालभाति प्राणायाम करना जरूरी होता है। पानी अंदर रुकने से कफ, जुकाम या साइनस बढ़ सकता है।
नल के सीधे ठंडे या बहुत गर्म पानी का, या नमक की सही मात्रा का उपयोग न करने से नाक के नाजुक ऊतकों में जलन, सूजन या संक्रमण हो सकता है। हमेशा उबला हुआ गुनगुना पानी और सही मात्रा में सेंधा/सादा नमक मिलाना चाहिए।
ऐसे ही सूत्र नेति में सूत्र को नाक के अंदर बहुत तेजी से या झटके से डालने की कोशिश करने से नाक की अंदरूनी परत छिल सकती है, खून आ सकता है या घाव हो सकता है। बिना साफ किए या बिना चिकनाई (जैसे हल्का गुनगुना पानी या तेल) लगाए सूत्र का उपयोग करने से घर्षण बढ़ता है और इंफेक्शन का खतरा होता है।