मधुमेह, कब्ज और तनाव में लाभकारी 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन', जाने इसके लाभ

नई दिल्ली, शरीर, मन और आत्मा के संतुलित विकास के लिए योग संस्कृति में अनेकों आसनों का वर्णन मिलता है। 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन' उन्हीं प्रमुख आसनों में से एक है। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, पाचन तंत्र को सुदृढ़ करने तथा शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में सहायक माना जाता है।;

By :  IANS
Update: 2026-07-29 07:06 GMT

नई दिल्ली, शरीर, मन और आत्मा के संतुलित विकास के लिए योग संस्कृति में अनेकों आसनों का वर्णन मिलता है। 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन' उन्हीं प्रमुख आसनों में से एक है। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, पाचन तंत्र को सुदृढ़ करने तथा शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में सहायक माना जाता है।

यह आसन हठ योग की प्राचीन परंपरा का अंग है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे लेकर सटीक जानकारी दी है, जिसके अनुसार 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन' का नियमित अभ्यास करने से एड्रिनल ग्रंथि की स्थिति में सुधार होता है। साथ ही, यह कब्ज, दमा और पाचन संबंधी समस्याओं से निजात भी दिलाता है। मधुमेह रोगियों के लिए भी यह एक अच्छा विकल्प है। साथ ही यह आसन पेनक्रियाज को एक्टिव करता है।

यह मांसपेशियों को लचीला बनाता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर करता है और शरीर को डिटॉक्स करता है।

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट बिछा लें। इसके बाद दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं और रीढ़ को सीधा रखते हुए अपने दाएं पैर के घुटने को मोड़ते हुए बाहर की ओर निकालें। इसके बाद बाएं पैर का तल जमीन पर पूरी तरह टिका होना चाहिए। सिर को दाईं ओर घुमाएं और कंधे की दिशा में देखें। इस दौरान सामान्य गहरी सांस लेनी चाहिए। इसको लगभग 30 सेकंड तक करने के बाद सामान्य स्थिति में ले आएं, लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि इसे करने के दौरान ध्यान रीढ़ की हड्डी और सांस पर केंद्रित करना चाहिए। शुरुआती अभ्यास में बहुत अधिक जोर न लगाएं और अभ्यास की अवधि धीरे-धीरे बढ़ाएं।

यह आसन करने से पहले योग विशेषज्ञ से परामर्श करना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि सही तरीके से आसन करने की सलाह मिल सके। योग का अहम सूत्र है कि इसे दोपहर में न करें। आसन सूर्योदय या सूर्यास्त के समय करें। गर्मी जब सिर पर हो यानी चरम हो तो दोपहर के सत्र से बचें और एक अहम बात, कुशल योग प्रशिक्षक से सलाह जरूर लें।

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