राममंदिर के लिए बने कानून या आये अध्यादेश : स्वामी जीतेन्द्रानंद

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश चेल्मेश्वर ने स्पष्ट कर दिया है कि अदालत में विचाराधीन मामलों पर भी सरकार अध्यादेश ला सकती है और कानून बना सकती है

Update: 2018-11-04 18:05 GMT

नयी दिल्ली। देशभर से आये तीन हजार से अधिक साधु संतों ने केन्द्र एवं उत्तर प्रदेश सरकारों को आज ‘धर्मादेश’ दिया कि वह कानून अथवा अध्यादेश या किसी अन्य माध्यम से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे। 

अखिल भारतीय संत समिति के यहां तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय ‘धर्मादेश संत महासम्मेलन’ के समापन अवसर पर समिति के अध्यक्ष जगद्गुरू रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य ने धर्मादेश पढ़ कर सुनाया।

समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने संवाददाताओं से कहा, “राममंदिर के लिए सरकार कानून लाये या अध्यादेश, यही है संतों का धर्मादेश।” 

उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो उच्चतम न्यायालय से अनुरोध कर सकती है कि राममंदिर को लेकर जनभावनाएं उद्वेलित हैं और कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है इसलिए इस मामले की सुनवाई जल्द आरंभ कर दे।

उन्होंने कहा कि सरकार का काम व्यवस्थाएं एवं कानून बनाना है और न्यायालय का कार्य कानून की व्याख्या करना है। सरकार जो भी उचित समझे, उसे करें जिससे राममंदिर का मार्ग हर हाल में प्रशस्त हो। 

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