​​​​​​मुुफ्त स्वास्थ्य सेवा देना सबके बस की बात नहीं: नड्डा

विश्व स्वास्थ्य संगठन की नीति नियामक इकाई ‘वर्ल्ड हेल्थ एसेंबली’ की जिनेवा बैठक में भारत ने यह कहकर धाक जमाई है

Update: 2017-05-24 16:34 GMT

नयी दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन की नीति नियामक इकाई ‘वर्ल्ड हेल्थ एसेंबली’ की जिनेवा बैठक में भारत ने यह कहकर धाक जमाई है कि सीमित संसाधनों के बावजूद देश में सवा अरब आबादी को मुफ्त चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस सदंर्भ में सदस्य देशों के मंत्रियों के समक्ष देश में चलाए जा रहे पोलियाे उन्मूलन और प्रसव पूर्व टीकाकरण अभियान समेत संचारी और गैर संचारी रोगों की रोकथाम के लिए शुरु किए गए विभिन्न टीकाकरण अभियान तथा जेनरिक दवाओं और सस्ते चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता के प्रयासों की प्रभावी प्रस्तुति दी।

उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत स्रहस्राब्दि लक्ष्य 3 के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के नौ बड़े लक्ष्यों को हासिल कर लेगा, हालांकि देश की बड़ी आबादी को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल करना एक बड़ी चुनौती है लेकिन इसके बावजूद आमजन को गुणवत्ता युक्त किफायती स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि 2020 तक देश में 90 फीसदी लोगों का टीकाकरण पूरा कर लिया जाएगा। इलाज से बचाव को ज्यादा अहमियत देते हुए गैर संचारी रोगों की पूर्व जांच के लिए सार्वभाैम स्क्रीनिंग अभियान शुरु किया गया है।

सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत जीवन रक्षक दवाएं और नैदानिक सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराने की कोशिश हो रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने इस अवसर पर देश की नयी स्वास्थ्य नीति का ब्यौरा देते हुए कहा कि इसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और बढ़ाने तथा इन्हें दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने की प्रभावी रणनीति बनाई गई है। इसमें राज्य सरकाराें से भी सहयोग लिया जा रहा है।

कल से आरंभ हुई वर्ल्ड हेल्थ एसेंबली की बैठक 31 मई तक चलेगी। इस बैठक में 193 देशों के स्वास्थ्य मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। बैठक में सतत विकास के लिए 2030 के स्वास्थ्य एजेंडे को गति देने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। 
 

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