ट्विशा शर्मा केस : बिना पुलिस को सूचना दिए शव हटाने को लेकर एसपी वैद ने उठाए गंभीर सवाल
पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने ट्विशा शर्मा डेथ केस को लेकर कहा कि ऐसे मामलों में सबसे जरूरी होता है कि पुलिस और संबंधित एजेंसियां तुरंत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन करें, लेकिन यहां पर शुरुआती स्तर पर ही कई गलतियां होती नजर आ रही हैं।;
जम्मू। पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने ट्विशा शर्मा डेथ केस को लेकर कहा कि ऐसे मामलों में सबसे जरूरी होता है कि पुलिस और संबंधित एजेंसियां तुरंत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन करें, लेकिन यहां पर शुरुआती स्तर पर ही कई गलतियां होती नजर आ रही हैं।
एसपी वैद ने कहा कि ऐसे मामले में सबसे पहले तो यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी जाती, ताकि मौके पर पहुंचकर क्राइम सीन को सुरक्षित किया जा सके, उसकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी हो सके और किसी भी तरह का सबूत नष्ट न हो। लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ और यही वजह है कि अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
एसपी वैद ने कहा कि कुछ वीडियो फुटेज और सीसीटीवी में यह दिख रहा है कि मृतका के शव को बिना पुलिस को सूचना दिए स्थानांतरित किया गया। यह अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है कि ऐसा क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि अगर परिवार या संबंधित लोग निर्दोष थे, तो फिर पुलिस को तुरंत क्यों नहीं बुलाया गया?
उन्होंने कहा कि इस मामले में एक रिटायर्ड सेशन जज, जो मृतका की सास हैं, उन्हें भी आरोपी बताया जा रहा है, लेकिन उन्हें एंटी-सिपेटरी बेल मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि सभी संदिग्ध व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जाना चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। कई बार केवल पूछताछ से ही पूरी कहानी साफ हो जाती है कि वास्तव में घटनाक्रम क्या था।
वैद ने कहा कि इस तरह के मामलों में सभी पक्षों की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। मृतका के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स, महत्वपूर्ण संपर्कों और घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच जरूरी है। अगर सच में आत्महत्या का मामला है, तो भी यह पता करना जरूरी है कि क्राइम सीन को डिस्टर्ब क्यों किया गया, शव को क्यों हटाया गया और पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी गई। उनके अनुसार, ये सभी सवाल जांच को और गंभीर बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद दुखद और चिंताजनक है। देश में इस तरह की घटनाएं होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, खासकर जब एक युवा लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती है और उसके बाद मामला और ज्यादा विवादों में फंस जाता है। इस तरह के मामलों में पुलिस, न्यायपालिका और प्रशासन सभी की जिम्मेदारी होती है कि वे संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ काम करें। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को यह भरोसा मिलना चाहिए कि किसी भी मामले में सच्चाई को छुपाया नहीं जाएगा और दोषियों को सजा जरूर मिलेगी।