यूपी में 100 से ज्यादा भाजपा विधायकों पर टिकट का संकट, 2024 से सबक लेकर बदल सकती है रणनीति
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बीजेपी के आंतरिक सर्वे में 100 से ज्यादा विधायकों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी के संकेत मिले हैं। जानिए टिकट वितरण की नई रणनीति और 2024 से मिले सबक।;
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ भाजपा उम्मीदवारों के चयन को लेकर लगातार सर्वे और फीडबैक जुटा रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के आंतरिक आकलन में 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के खिलाफ जमीनी स्तर पर एंटी-इनकंबेंसी के संकेत मिले हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट पर फैसला बदलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी किसी विधायक का टिकट काटे जाने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
100 से ज्यादा विधायकों पर नजर, सर्वे में सामने आया फीडबैक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की उन 255 विधानसभा सीटों में जमीनी आकलन कराया है, जिनका प्रतिनिधित्व फिलहाल पार्टी के विधायक कर रहे हैं। इस आकलन में करीब 100 विधायक पार्टी के रडार पर आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं के बीच विधायकों को लेकर असंतोष और भरोसे की कमी के संकेत मिले हैं।
इसके अलावा स्थानीय संगठन के पदाधिकारियों के साथ विधायक के संबंध और संगठनात्मक स्तर पर तालमेल को भी उम्मीदवार चयन में ध्यान में रखा जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ विधायकों के बारे में RSS से फीडबैक लिए जाने की बात सामने आई है।
जीत की संभावना होगी टिकट का बड़ा आधार
बीजेपी के उम्मीदवार चयन में इस बार केवल वरिष्ठता या लगातार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड ही निर्णायक नहीं माना जा रहा है। पार्टी विधानसभा स्तर पर जनता के बीच स्वीकार्यता, विधायक के कामकाज, स्थानीय संगठन से तालमेल और चुनाव जीतने की संभावनाओं को प्रमुख आधार बना रही है।
जुलाई और अगस्त में सामने आई रिपोर्टों में भी बीजेपी के सर्वे अभियान का जिक्र हुआ था। इनमें बूथ स्तर से लेकर विभिन्न सामाजिक समूहों, कार्यकर्ताओं, किसानों, महिलाओं और युवाओं से फीडबैक लेने की बात कही गई थी। कई सीटों पर नए चेहरों की संभावनाओं का भी आकलन किया जा रहा है।
युवाओं और नए चेहरों को मिल सकता है मौका
लगातार दो बार सरकार में रहने के बाद पार्टी के सामने मौजूदा विधायकों को लेकर स्थानीय स्तर की नाराजगी को संभालने की चुनौती है। ऐसे में संगठन से जुड़े नए चेहरों, युवाओं और महिलाओं को भी उम्मीदवार चयन में जगह देने पर विचार किए जाने की रिपोर्ट है।
हालांकि, लंबे समय से विधायक रहे सभी नेताओं का टिकट कटना तय नहीं माना जा रहा। पार्टी के आकलन में यदि किसी मौजूदा विधायक की क्षेत्र में मजबूत पकड़ और चुनाव जीतने की संभावना बनी रहती है तो उसके अनुभव को भी महत्व दिया जा सकता है। यानी टिकट वितरण का आधार केवल कार्यकाल की संख्या नहीं, बल्कि मौजूदा जमीनी स्थिति हो सकती है।
2024 के लोकसभा चुनाव से क्या सबक?
भाजपा के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक सबक रहा। राज्य की 80 लोकसभा सीटों में पार्टी की संख्या 2019 के 62 से घटकर 2024 में 33 रह गई। वहीं समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपने 49 मौजूदा सांसदों को दोबारा टिकट दिया था, जिनमें से 27 चुनाव हार गए। पार्टी के भीतर इस प्रदर्शन को उम्मीदवार चयन और स्थानीय एंटी-इनकंबेंसी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इसी अनुभव के आधार पर उम्मीदवारों के चयन में ज्यादा सतर्कता बरतती दिखाई दे रही है। अंतिम टिकट सूची आने तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि सर्वे में सामने आए संकेतों का कितने मौजूदा विधायकों पर सीधा असर पड़ेगा।