उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी पर मौलाना का फतवा, शरीयत के खिलाफ बताया निकाह

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पत्रकार निधि राजदान की शादी पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने फतवा जारी किया है। उन्होंने इस निकाह को शरीयत के अनुसार नाजायज बताया है।;

Update: 2026-11-02 06:25 GMT

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान की शादी को लेकर धार्मिक बहस शुरू हो गई है। बरेली के ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस विवाह पर फतवा जारी किया है। उन्होंने अपने धार्मिक मत के आधार पर इस निकाह को इस्लामी शरीयत के मुताबिक नाजायज करार दिया है। मौलाना के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।

मौलाना ने निकाह को लेकर क्या दलील दी?

रविवार को जारी अपने बयान में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इस्लाम में निकाह के लिए कुछ निश्चित धार्मिक नियम और शर्तें हैं। उनके मुताबिक, मुस्लिम पुरुष और गैर-मुस्लिम महिला के विवाह को लेकर शरीयत में विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि उमर अब्दुल्ला मुस्लिम हैं, जबकि निधि राजदान गैर-मुस्लिम हैं। इसी आधार पर उन्होंने इस शादी को इस्लामी नजरिये से मान्य नहीं बताया।

मौलाना का कहना है कि उमर अब्दुल्ला को निकाह से पहले निधि राजदान के इस्लाम कबूल करने की शर्त पूरी करनी चाहिए थी। उनके अनुसार, ऐसा होने के बाद निकाह किया जाता तो उसे शरीयत के मुताबिक जायज माना जा सकता था। हालांकि, यह मौलाना का धार्मिक मत है और इसे किसी अदालत या कानूनी संस्था के फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुई शादी

उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी शादी की जानकारी साझा की थी। उन्होंने लिखा कि शुक्रवार को उनके जीवन में एक नई यात्रा की शुरुआत हुई। पोस्ट के साथ उन्होंने निधि राजदान को टैग करते हुए दोनों की तस्वीरें भी साझा कीं।

सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने शुक्रवार को विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत शादी की है। इस कानून के तहत अलग-अलग धर्मों के दो वयस्क बिना धर्म परिवर्तन किए विवाह कर सकते हैं। उमर अब्दुल्ला 56 वर्ष के हैं, जबकि निधि राजदान की उम्र 49 वर्ष बताई गई है। दोनों की यह दूसरी शादी है। उमर की पहली पत्नी पायल से उनका वैवाहिक संबंध इस साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद समाप्त हुआ था।

सारा अली खान के मामले में भी जारी किया था फतवा

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी इससे पहले अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ धाम जाने और वहां पूजा-अर्चना करने पर भी आपत्ति जता चुके हैं। उन्होंने उस समय भी फतवा जारी करते हुए कहा था कि इस्लामी मान्यताओं के अनुसार मुस्लिम व्यक्ति का दूसरे धर्म की पूजा-पद्धति में शामिल होना जायज नहीं है।

सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में मौलाना ने सारा अली खान के मंदिर जाने को लेकर अपनी धार्मिक राय रखी थी और उनसे तौबा करने की अपील की थी।

उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी पर आया ताजा बयान एक बार फिर निजी जीवन, धार्मिक मान्यताओं और विशेष विवाह अधिनियम के तहत मिलने वाले कानूनी अधिकारों को लेकर बहस को सामने ले आया है।

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