पंजाब चुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका, तीन पूर्व विधायकों ने थामा भाजपा का दामन

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी के तीन नेताओं का एक साथ भाजपा में शामिल होना राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने का संकेत दे रहा है।;

Update: 2026-11-02 06:35 GMT

नई दिल्ली: पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य में दल-बदल की राजनीति के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी से इस्तीफा देने वाले तीन नेताओं ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इनमें समाना से पूर्व विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा, सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह शामिल हैं। तीनों नेताओं ने दिल्ली में भाजपा का दामन थामा। इन नेताओं के पार्टी छोड़ने को पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी के तीन नेताओं का एक साथ भाजपा में शामिल होना राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने का संकेत दे रहा है। खास बात यह है कि इन नेताओं के पार्टी छोड़ने के पीछे संगठन और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष भी एक महत्वपूर्ण वजह रहा है।

रविवार को दो विधायकों ने छोड़ी थी आम आदमी पार्टी

भाजपा में शामिल होने वाले चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने रविवार को आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। चेतन सिंह जौड़ामाजरा पटियाला जिले की समाना विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जबकि हरमीत सिंह पठानमाजरा सनौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। दोनों नेताओं के इस्तीफे से पंजाब की सियासत में हलचल मच गई थी। उनके पार्टी छोड़ने के बाद सोमवार को भाजपा में शामिल होने से राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला है। हालांकि, दोनों नेताओं ने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर रविवार को ही संकेत दे दिए थे।

कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी विधानसभा से दिया इस्तीफा

तीसरे नेता कुंवर विजय प्रताप सिंह का भाजपा में शामिल होना भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह अमृतसर नॉर्थ विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने सोमवार, 2 नवंबर को पंजाब विधानसभा की सदस्यता छोड़ने की घोषणा की और अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को भेज दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में एक नवंबर 2026 से विधानसभा की सदस्यता छोड़ने की बात कही है। कुंवर विजय प्रताप सिंह वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। हालांकि, बाद के वर्षों में उनका पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के साथ टकराव बढ़ता गया। वह कई मौकों पर सरकार की कार्यप्रणाली और नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा चुके थे।

बेअदबी मामलों में न्याय में देरी से नाराजगी

कुंवर विजय प्रताप सिंह की नाराजगी की एक प्रमुख वजह वर्ष 2015 के बरगाड़ी बेअदबी मामले और उससे जुड़े पुलिस फायरिंग प्रकरणों की जांच रही है। उन्होंने इन मामलों में न्याय मिलने में देरी को लेकर पंजाब सरकार की आलोचना की थी। जनवरी 2023 में जांच से जुड़े मतभेदों के बाद उन्होंने विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना था कि बेअदबी और पुलिस फायरिंग जैसे गंभीर मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने पंजाब में नशे के कारोबार, अपराध, जबरन वसूली और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा था। उनका आरोप रहा कि इन समस्याओं पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है।

मजीठिया की गिरफ्तारी पर भी उठाए थे सवाल

जून 2025 में शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी और विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई को लेकर भी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने आपत्ति जताई थी। उनके लगातार सार्वजनिक बयानों को आम आदमी पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के रूप में देखा। इसके बाद वर्ष 2025 में पार्टी ने उन्हें पांच साल के लिए निलंबित कर दिया था। इस कार्रवाई के बावजूद उन्होंने सरकार और पार्टी नेतृत्व की नीतियों पर सवाल उठाना जारी रखा।

पंजाब की राजनीति में बदल सकते हैं समीकरण

तीन नेताओं के भाजपा में शामिल होने से पंजाब में विपक्षी राजनीति को नई दिशा मिलने की संभावना है। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे नेताओं को अपने साथ लाना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अहम हो सकता है।

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